नई दिल्ली: संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने जोरदार विरोध जताया. बैठक में शिवसेना (UBT) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों को बुलाए जाने पर विपक्षी सांसद भड़क गए और वे बैठक से वॉकआउट कर चले गए. कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि लोकसभा स्पीकर के फैसले के विरोध में विपक्ष ने बैठक से बहिर्गमन का फैसला लिया. सीपीएम नेता जॉन ब्रिटास ने इसे न्याय का उपहास बताया.
क्या था विवाद?
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को शिवसेना (UBT) के छह बागी सांसदों को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना में विलय की मंजूरी दे दी थी. साथ ही तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों को लोकसभा में अलग बैठने की अनुमति दी गई.
विपक्षी दलों का कहना है कि यह फैसला गैरकानूनी है. शिवसेना (UBT) सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि बगावत करने वाले सभी सांसदों को अयोग्य ठहराया जाना चाहिए. टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भी सवाल उठाया कि बागी सांसदों को बैठक में बुलाने का आधार क्या है.
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद एन.डी. गुप्ता ने भी अपनी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के ‘हाइजैक’ होने का आरोप लगाया और इसे लोकतंत्र की हत्या बताया. संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने वाला है और 13 अगस्त तक चल सकता है. सर्वदलीय बैठक में आमतौर पर सरकार विधायी कार्यक्रम की जानकारी देती है, लेकिन इस बार बैठक शुरू होते ही हंगामा हो गया.