जब आप शिमला की संजौली मस्जिद की तस्वीरें देख रहे थे, बरेली में सैकड़ो मुसलमान सड़कों पर खड़े थे, उन्हें बुलडोजर से ज्यादा एक कागज से डर लग रहा था, खुद को मुस्लिमों का रहनुमा कहने वाले तौकीर रजा के भी होश उड़े हुए थे, क्योंकि शिमला जैसी कहानी अगर उनके शहर में दोहराई जाती तो अंजाम क्या होता, वो खुद जानते थे. फिर सवाल ये है कि अंजाम जानने के बाद भी प्लान कौन बना रहा था.
पूरा मामला किला थाना क्षेत्र के मलूकपुर चमन मठिया का है, जहां एक जर्जर मस्जिद है, जिसके अंदरी हिस्से में टाइल्स और ऊपरी हिस्से में गुंबद लगाने का काम जैसे ही शुरू हुआ, एक समुदाय ने विरोध शुरू कर दिया, क्योंकि उनकी आपत्ति इस बात पर थी कि कहीं रेनोवेशन के नाम पर मस्जिद विस्तार का काम न शुरू हो जाए. और फिर कितनी जमीन पर कब्जा होता है, इसका बड़ा उदाहरण मध्य प्रदेश के भिलाई से सामने आया है.
वहां साल 1984 में करबला समिति को मस्जिद बनाने के लिए 500 से 800 वर्ग फीट जमीन दी गई थी. लेकिन उन्होंने ढाई एकड़ जमीन पर कब्जा जमा लिया. मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो बुलड़ोजर एक्शन के आदेश जारी हुए, लेकिन पुलिस के सामने चुनौती ये थी कि कहीं छतरपुर की तरह पथराव न हो जाए, इसलिए मौके पर 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी पहुंचे, जहां एक मजार, इमामबाड़ा, कई दुकानें और एक मैरिज हॉल पर बुलडोजर चला. अगर बरेली में लोग नहीं जागते तो शायद ये हालत हो सकती थी, क्योंकि धर्मस्थल के नाम पर अतिक्रमण की कहानी कोई नई नहीं है. इसीलिए जैसे ही बरेली के पार्षद तक मस्जिद रेनोवेशन वाली बात पहुंची.
पार्षद नीरज कुमार ने SHO हरेन्द्र सिंह को बकायदा कॉल की, जिसके बाद स्थानीय इंस्पेक्टर मौके पर पहुंचे. जो अवैध निर्माण था उसे तुड़वा दिया और ये चेतावनी देकर सबको छोड़ दिया कि आगे कोई भी निर्माण बिना एसडीएम की परमिशन के किया तो खैर नहीं होगी.
पर सवाल ये उठता है कि बिना परमिशन निर्माण की हिम्मत आखिर जुटाई किसने, क्या निर्माण कराने वालों को नहीं पता था एक कागज नहीं होगा तो निर्माण ही नहीं रुकेगा, बल्कि बुलडोजर भी चल जाएगा. क्या उन्होंने योगी का वो आदेश नहीं सुना था कि जहां भी अवैध निर्माण दिखे, उसे तुरंत हटाओ, ये मत देखो कि सामने वाले का रसूक कितना बड़ा है.
शायद ये बात मस्जिद के रेनोवेशन में लगे लोगों को तब समझ आई, जब बुलडोजर पहुंच चुका था. इसीलिए बरेली के मौलाना तौकीर रजा जो कुछ दिनों पहले तक खुलेआम धर्म परिवर्तन की बात कर रहे थे, उन्होंने भी खुद अपने लोगों को समझाने की कोशिश की, क्योंकि तौकीर रजा को पता है अवैध निर्माण वालों का साथ दिया तो बचना मुश्किल होगा, और तब तो तौकीर रजा अखिलेश यादव की तरह ये भी नहीं कह पाएंगे कि दूसरे समुदाय का था इसलिए बुलडोजर चल गया, क्योंकि ये वही बरेली है, जहां का वीडियो कुछ दिनों पहले वायरल हुआ तो यूपी पुलिस ने सख्त एक्शन लिया.
बिल्डर राजीव राणा के घर और रिजॉर्ट दोनों पर बुलडोजर चला दिया, जिससे लोगों में ये संदेश गया कि राणा हो या यादव सब पर बुलडोजर चल रहा है, अखिलेश यादव को भले ही बुलडोजर की पहियों में जाति की लकीर नजर आए, पर बरेली से आई तस्वीरें ये बयां करती हैं कि एक्शन सब पर हो रहा है. पर हैरानी की बात ये है कि इतने तगड़े एक्शन के बाद भी वो लोग कौन हैं जो बुलडोजर और बाबा दोनों को चुनौती दे रहे हैं.