नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को यह साफ करने से इनकार कर दिया कि क्या अमेरिका इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमले करेगा या उसके परमाणु ठिकानों को निशाना बनाएगा. उन्होंने कहा, "हो सकता है मैं करूं, हो सकता है न करूं. कोई नहीं जानता कि मैं क्या करने वाला हूं." ट्रंप ने संकेत दिया कि अगला हफ्ता या उससे भी कम समय में कुछ बड़ा होने वाला है. व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, "एक हफ्ते पहले और अब में बहुत फर्क है. कोई नहीं जानता मैं क्या करूंगा."
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने उनसे बातचीत की पेशकश की है, लेकिन अब "बात करने में बहुत देर हो चुकी है." उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ने व्हाइट हाउस में बातचीत का प्रस्ताव रखा था, हालांकि उन्होंने इसके समय या विवरण पर कुछ नहीं बताया. ट्रंप ने ईरान को "पूरी तरह रक्षाहीन" बताया और कहा कि उसकी "कोई हवाई रक्षा नहीं है." उन्होंने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से कहा कि वे तेहरान पर हमले "जारी रखें."
जब ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई के बारे में पूछा गया, तो ट्रंप ने सिर्फ इतना कहा, "गुड लक." उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का ईरान के प्रति धैर्य अब खत्म हो चुका है. ट्रंप ने पहले दावा किया था कि अमेरिका को पता है कि खामनेई "कहां छिपे हैं." हालांकि, उन्होंने अभी खामनेई पर हमले की पुष्टि नहीं की, लेकिन चेतावनी दी कि अमेरिका का धैर्य "कम हो रहा है." ट्रंप ने ईरान से "बिना शर्त आत्मसमर्पण" की मांग की और कहा कि ईरान को कभी परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए.
दूसरी ओर, खामनेई ने बुधवार को ट्रंप की आत्मसमर्पण की मांग को ठुकरा दिया. एक टेलीविजन संदेश में उन्होंने कहा कि ईरान कभी झुकेगा नहीं. खामनेई ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने सैन्य हस्तक्षेप किया, तो उसे "अपूरणीय नुकसान" उठाना पड़ेगा. उन्होंने कहा, "जो लोग ईरान और इसके इतिहास को जानते हैं, वे कभी इस देश से धमकी की भाषा में बात नहीं करेंगे. ईरानी राष्ट्र कभी आत्मसमर्पण नहीं करेगा. अमेरिका को पता होना चाहिए कि उसका कोई भी सैन्य हस्तक्षेप भारी नुकसान के साथ आएगा."
इस बीच, इजरायल और ईरान के बीच छठे दिन भी मिसाइल हमले जारी रहे, जिसमें 600 से ज्यादा लोग मारे गए. ईरान को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ, जहां स्वास्थ्य मंत्रालय ने मरने वालों की संख्या 585 बताई. बुधवार को ईरान ने दावा किया कि उसने इजरायल पर फत्ताह-1 हाइपरसोनिक मिसाइल दागी, जो इस युद्ध में पहली बार इस्तेमाल हुई. तेल अवीव में भी विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं. इजरायल ने कहा कि ईरान के हमलों से अब तक 24 लोग मारे गए और 1,300 से ज्यादा घायल हुए हैं. बुधवार को इजरायल के हमले ज्यादातर तेहरान के आसपास केंद्रित थे. इजरायल ने यह भी दावा किया कि उसने ईरान की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी के मुख्यालय पर हमला किया.
यह तनाव तब और बढ़ गया, जब सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें आईं कि अमेरिका और इजरायल मिलकर खामनेई की हत्या की योजना बना रहे हैं. हालांकि, ट्रंप ने इन खबरों की पुष्टि नहीं की. इस युद्ध ने मध्य पूर्व में बड़े पैमाने पर अस्थिरता का खतरा पैदा कर दिया है, और वैश्विक नेता इस स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं. भारत ने भी इस युद्ध पर चिंता जताई है और दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है. यह स्थिति तेजी से बदल रही है, और अगले कुछ दिन इस क्षेत्र के भविष्य के लिए निर्णायक हो सकते हैं.