Iftar Party on the Ganga River: गंगा नदी में इफ्तार पार्टी का आयोजन कर जो कानून व्यवस्था को चैलेंज रहे थे, वो आज कोर्ट के सामने दहाड़ मारकर रो रहे हैं, हाथ जोड़कर कह रहे हैं जज साहब गलती हो गई माफ कर दीजिए, लेकिन माफी नहीं मिल रही, बल्कि वाराणसी की अदालत ने दूसरी बार इन 14 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है, और जज साहब ने इसके साथ जो टिप्पणी की है, वो काफी मायने रखती हैं. करीब डेढ़ घंटे तक चली बहस के बाद 6 पन्ने का जो आदेश वो पढ़ते हैं, उससे इन आरोपियों की कलई खुल जाती है. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद एडीजे आलोक कुमार कहते हैं.
ये काम जान-बूझकर किया गया था, ये लोग कोई बच्चे नहीं हैं. सबसे बड़ी बात तो ये है कि जिस घाट पर उन लोगों ने इफ्तार किया, वो पछंगा घाट था, और वो गंगा आरती का समय था. जगह-जगह पूजा चल रही थी. ऐसे में बीच धारा में इस तरह का कृत्य करना गंभीर अपराध है. इतना ही नहीं जज साहब ये भी कहते हैं कि सोशल मीडिया पर वीडियो डालना यह जाहिर करता है कि यह घटना जानबूझकर सामाजिक सद्भाव को प्रभावित करने के मकसद से की गई थी. जिन जज साहब ने ये टिप्पणी की है, उनके कई फैसले चर्चा में रहे हैं...
कौन हैं जज आलोक कुमार
47 साल के जज आलोक कुमार महाराष्ट्र के रमाबाई नगर के रहने वाले हैं
2009 में इनकी पहली पोस्टिंग बहराइच में ADJ सिविल जज (JR. डिविजन हुई)
उसके बाद सैदपुर-गाजीपुर में रहे, फिर बुलंदशहर में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट बने
इटावा, आजमगढ़ और कानपुर नगर में भी इनकी पोस्टिंग अब तक रह चुकी है
अप्रैल 2025 में ये वाराणसी में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज बने
आप शायद ये जानकर दंग रह जाएं कि इन आरोपियों ने सिर्फ गंगा नदी में इफ्तार ही नहीं किया, इन्हें सिर्फ नॉनवेज बिरयानी ही नहीं परोसी गई बल्कि इन्होंने नाव भी छीनी है... नाव मालिकों अनिल साहनी और रंजन साहनी ने पुलिस को दी गई शिकायत में आरोप लगाया कि आरोपियों ने जबरन नाव ले ली थी, मना करने पर धमकी दे रहे थे. ये सारे लड़के 19 से 25 साल के हैं, तो इन्हें ये सीख कौन दे रहा था...
इनका मकसद शायद दुनिया के सामने कोई संदेश देने का था. वरना काशी में इतने बरसों में कभी ऐसा रोजा इफ्तार किसी ने नहीं किया था, और इन लोगों की हिमाकत देखिए कि पहले तो नाव वाले को धमकी देकर खुद इफ्तार पार्टी की, फिर पुलिस ने गिरफ्तार किया, फिर भारतीय जनता युवा मोर्चा के महानगर अध्यक्ष रजत जायसवाल के वकील को भी धमकी दिलवाने लगे, जिसका खुलासा दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में किया है. ये वही रजत जायसवाल हैं, जिन्होंने इन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया. इन्हें सलाखों के पीछे पहुंचाने में भूमिका निभाई.
एडवोकेट शशांक शेखर त्रिपाठी बताते हैं, ''19 मार्च की शाम जब वो अदालत में बहस करने के बाद परिसर में पहुंचे, तो वहां 5-6 अज्ञात युवक रजत जायसवाल को जान से मारने की साजिश रच रहे थे, जब अधिवक्ता ने इस पर आपत्ति जताई, तो आरोपियों ने उन्हें भी अंजाम भुगतने और जान से मारने की धमकी दी.''
अब सवाल ये उठता है कि आखिर ये कैसी मानसिकता है, एक तरफ ये कोर्टरूम में रोते हैं, तो दूसरी तरफ इनकी हरकते नहीं सुधरती...ये बात भी बेहद हैरान करती है ज्यादातर आरोपी एक ही खानदान के हैं, बाबू बीड़ी वाले के नाम से मशहूर घराने से कई लड़के इसमें शामिल हैं. इनमें मोहम्मद अव्वल, मोहम्मद समीर, मोहम्मद अहमद, नूर इस्लाम और मोहम्मद फैजान एक ही घर के रहने वाले हैं.