केंद्रीय मंत्री वीरेंदर कुमार खटीक पर बीजेपी के पूर्व विधायक ने कई संगीन आरोप लगाए थे जिसको केंद्रीय मंत्री ने सिरे से खारिज करते हुए उन्हें खुली चुनौती दे दी है। दरअसल मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री और महाराजपुर से विधायक रहे मानवेन्द्र सिंह ने खटीक पर आरोप लगाया था कि उन्होंने आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को कई विभागों में अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया है। सिंह का कहना था कि ऐसे लोगों की सार्वजनिक कार्यक्रमों में मौजूदगी अधिकारियों और आम जनता के बीच गलत संदेश देती है।
इसके अलावा, मानवेन्द्र सिंह ने दावा किया कि 2023 के विधानसभा चुनावों में खटीक ने बीजेपी उम्मीदवारों का विरोध किया था और उनके समर्थक पार्टी के विधायकों के साथ सहयोग नहीं कर रहे हैं। सिंह ने कहा कि यह स्थिति पार्टी के लिए हानिकारक साबित हो रही है।
अब केंद्रीय मंत्री वीरेंदर कुमार खटीक ने इन आरोपों के जवाब में कहा कि, ये आरोप निराशा और हताशा के परिणामस्वरूप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने चुनौती दी कि जो भी आरोप लगा रहे हैं, वे अपने आरोप साबित करें। खटीक ने कहा, "मैंने सरकार को अवैध धंधों को बंद करने का आदेश दिया है। मैं चुनौती देता हूं कि मेरे खिलाफ एक भी आरोप साबित करें। अब जब मधुमक्खी के छत्ते को छेड़ा गया है, तो आरोप लगाने वाले खुद को तैयार रखें।"
पूर्व मंत्री खटीक ने आगे कहा, "ये आरोप बाहरी नेताओं द्वारा लगाए जा रहे हैं। क्या ये बाहरी लोग, जो हमारे विचारों से सहमत नहीं हैं, हमें सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन के रास्ते सिखाएंगे? उन्हें पहले अपने कामों की समीक्षा करनी चाहिए। बीजेपी के दर्शन को समझने के बाद ही उन्हें मेरे साथ सार्वजनिक बहस में शामिल होना चाहिए।"
वीरेंद्र खटीक, जो आठ बार के लोकसभा सांसद हैं, उन्होंने दमोह में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ये बातें कहीं। वहीं, मानवेन्द्र सिंह, जो पहले कांग्रेस की सरकार में मंत्री थे, बाद में बीजेपी में शामिल हुए। सिंह के बेटे कामख्या प्रताप सिंह, महाराजपुर से विधायक हैं, जो खटीक के टीकमगढ़ लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। सूत्रों के अनुसार, पिछले हफ्ते खटीक ने अपने संसदीय क्षेत्र टीकमगढ़ में अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया था।
बीजेपी विधायक ललिता यादव ने मानवेन्द्र सिंह का समर्थन करते हुए कहा कि खटीक के प्रतिनिधियों को लेकर कही गई कई बातें सच हैं। यादव ने बताया कि खटीक द्वारा चुने गए लोग कांग्रेस के चुनावी एजेंट रह चुके हैं। उनके हस्तक्षेप के कारण स्थानीय विधायकों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यह राजनीतिक विवाद अब बीजेपी के भीतर भी चर्चा का विषय बन गया है।