कोलकाता ; पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में शराब की दुकानों को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मंगलवार को घोषणा करते हुए कहा कि अब किसी भी स्कूल, कॉलेज और मंदिर के एक किलोमीटर के दायरे में नई शराब की दुकान खोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी. सरकार का मानना है कि इस कदम से सामाजिक वातावरण बेहतर होगा और युवाओं पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकेगा.
कल्याणी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों और धार्मिक स्थलों के आसपास शराब की दुकानें होने से समाज में गलत संदेश जाता है. उन्होंने कहा कि छात्र और युवा देश का भविष्य हैं, इसलिए उनके आसपास का माहौल सुरक्षित और सकारात्मक होना चाहिए. इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह नई नीति लागू करने का फैसला किया है.
देशभर में शराब नीति को लेकर लंबे समय से बहस होती रही है. कई राज्यों ने शराब बिक्री को लेकर सख्त नियम बनाए हैं. बिहार में वर्ष 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है, जबकि गुजरात में कई वर्षों से शराब पर प्रतिबंध है. इसके अलावा नागालैंड और मिजोरम जैसे राज्यों में भी शराब बिक्री पर कड़े नियम लागू हैं.
शराब दुकानों की दूरी को लेकर अदालतें भी समय-समय पर दिशा-निर्देश देती रही हैं. वर्ष 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के 500 मीटर के भीतर शराब की दुकानें बंद करने का आदेश दिया था. इसके बाद कई राज्यों ने स्कूलों, कॉलेजों और धार्मिक स्थलों के आसपास शराब बिक्री को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग नियम बनाए.
पश्चिम बंगाल सरकार का यह नया फैसला सामाजिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. सरकार को उम्मीद है कि इससे युवाओं को बेहतर माहौल मिलेगा और समाज में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा.