पटना: बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज को मिली करारी शिकस्त के बाद मंगलवार को प्रशांत किशोर ने पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस की. हार की पूरी जिम्मेदारी खुद पर लेते हुए उन्होंने साफ कहा कि मैंने जनता तक अपनी बात सही तरीके से नहीं पहुंचा पाया. जो भरोसा जीतना था, वो नहीं जीत पाया. यह मेरी नाकामी है. लेकिन साथ ही उन्होंने चुनौती भरे लहजे में कहा कि जो लोग सोच रहे हैं कि मैं बिहार छोड़कर भाग जाऊंगा, वो बिल्कुल गलत हैं. अब सलाह देने का नहीं, सीधे संघर्ष करने का वक्त है. जब तक हार स्वीकार नहीं करते, हार होती नहीं.
नीतीश कुमार को खुली चुनौती
प्रशांत किशोर ने सबसे बड़ा बम फोड़ते हुए कहा, ''मैं आज ऐलान करता हूं, अगर नीतीश कुमार अपने वादे के मुताबिक बिहार की डेढ़ करोड़ महिलाओं को 2-2 लाख रुपए सच में दे दें और यह साबित कर दें कि उन्होंने वोट पैसे से नहीं खरीदे, तो मैं बिना एक शब्द कहे राजनीति हमेशा के लिए छोड़ दूंगा.'' उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव में सरकार ने करीब 40 हजार करोड़ रुपए के लुभावने वादे किए और पहली किस्त में 10-10 हजार रुपए बांटे, जिसका असर वोटिंग पर पड़ा.
20 नवंबर को मौन उपवास
अपनी गलतियों का प्रायश्चित करते हुए पीके ने बताया कि 20 नवंबर को वे गांधी के भितिहरवा आश्रम में एक दिन का मौन सामूहिक उपवास रखेंगे. बोले, ''गुनाह नहीं किया, सिर्फ गलती हुई है. वोट न मिलना गुनाह नहीं होता. हम फिर उठेंगे, सुधार करेंगे और बिहार को बदलने की जिद पूरी करके ही दम लेंगे.'
महिलाओं से खास अपील
उन्होंने नीतीश सरकार से मांग की कि अगले छह महीने में बाकी की किस्तें (2 लाख रुपए तक) हर पात्र महिला को दे दी जाएं. साथ ही महिलाओं से कहा, ''जिस बहन को पूरा पैसा न मिले, वो जन सुराज से संपर्क करे. हम आपकी लड़ाई लड़ेंगे.'' प्रशांत किशोर ने एनडीए को जीत की बधाई देते हुए कहा कि अब सत्ता की असली परीक्षा शुरू होगी. जनता देखेगी कि वादे पूरे होते हैं या सिर्फ वोट के लिए थे. बैठक में साफ था, प्रशांत किशोर न हारे हैं, न थके हैं, न रुके हैं. यह सिर्फ एक पारी का आउट होना है, खेल अभी बहुत बाकी है.