Maha Kumbh stampede report: भगदड़ के पीछे कौन था इसकी रिपोर्ट सीएम योगी को सौंपी गई है? एक महंत को धोखा देने वाला कोई और नहीं बल्कि उनका खुद का बनाया सिस्टम ही था. आम लोगों की जान का जिम्मेदार कौन था ये पूरी रिपोर्ट आपको समझा देगी? रिपोर्ट साफ कहती है कि अधिकारियों के बीच कोई को-ऑर्डिनेशन नहीं था, जिसके कारण वहां हादसा हुआ है. मेले के एसएसपी राजेश द्विवेदी और सीनियर अधिकारियों और कंट्रोल रूम की दिशा अलग-अलग कैसे थी. महाकुंभ नगर ज़िला नया बना, वहां अधिकारियों की तैनाती जिले के मुताबिक ही की गई.

अधिकारियों के बीच कोई को-ऑडिनेशन नहीं
मेला क्षेत्र और प्रयागराज़ जिले के अधिकारियों के बीच कोई को-ऑडिनेशन नहीं था. प्रयागराज़ जिले के कमिश्नर खुद मैदान पर आकर वो काम कर रहे जो उन्हें नहीं करना चाहिए था. सूत्र कहते हैं कि रिपोर्ट में कई चौंकाने वाली बात लिखी गई है, सबसे बड़ा खुलासा ये है कि अधिकारियों की हनक भारी पड़ गई, अधिकारियों में कोई को-ऑडिनेशन नहीं था.यहां DIG वैभव कृष्ण कंट्रोल रूम में बैठकर सीधे भीड़ से बात कर रहे हैं, जबकि उनको अपनी पुलिस को बताना था. जो भीड़ में तैनात थी, वो भीड़ को समझाती. उधर खुद कमिश्नर के पास माइक है, और भगदड़ की आशंका जताते हैं. तो सुनिए वो रिपोर्ट जो किसी मीडिया हाउस ने आपको नहीं बताई.

प्रयागराज के कमिश्नर पंत को की जा रही थी रिपोर्ट
प्रयागराज के कमिश्नर विजय विश्वास पंत का बैच 2004 है. वो प्रयागराज के कमिश्नर हैं, यानि मंडलायुक्त हैं, ये पद किसी IAS के पास ही होता है. यानि प्रयागराज मंडल के सबसे सीनियर अधिकारी का पद यही होता है. अब एक नया ज़िला बना, मेला नगर के कमिश्नर IPS तरूण गाबा को बनाया गया. यानि ये मेला क्षेत्र के सबसे बड़े बॉस बनाए गए. तरूण गाबा का बैच है 2001, यानि सीनियर तरूण गाबा हैं, लेकिन उन्हें मेले की जिम्मेदारी मिली ज़रूर, लेकिन रिपोर्ट प्रयागराज जिले के कमिश्नर विजय विश्वास पंत को करना था.

पूरी टीम को कौन लीड कर रहा था पता नहीं!
यहां एक बात समझिए एक IAS हैं और एक IPS हैं. अब आगे बढ़िए, इन दोनों अधिकारियों के ठीक नीचे IPS वैभव कृष्ण हैं जिन्हें मेला क्षेत्र का DIG बनाया गया जो 2011 बैच के अधिकारी हैं. वैभव कृष्ण के जो रिपोर्टिंग बॉस हैं उनका नाम है तरूण गाबा. वैभव कृष्ण से एक साल सीनियर बैच के अधिकारी डॉक्टर अजय पाल शर्मा को मेला का अतरिक्त कमिश्नर बनाकर भेजा गया. अजय पाल के बॉस भी तरूण गाबा ही थे. जबकि मेला क्षेत्र के एसएसपी हैं राजेश द्विवेदी, इनको भी रिपोर्ट कमिश्नर तरूण गाबा को देना था. कई जिलों के अधिकारी बुलाए गए थे. 50 हज़ार फोर्स तैनात थी.तो ये समझ नहीं आया, पूरी टीम को कौन लीड कर रहा था? इस पूरी बात को समझने के लिए थोड़ा और वक्त दीजिए.

अब ये तस्वीर देखिए, ये हैं विजय विश्वास पंत प्रयागराज के कमिश्नर, जो खुद भीड़ के सामने कहते हैं कि भगदड़ की संभावना है. तो सवाल उठता है इनके नीचे के अधिकारी कहां थे? क्या अधिकारियों में कोऑर्डिनेशन नहीं था. इसका एक सबूत दिखाते हैं. 27 को योगी आदित्यनाथ प्रयगाराज गए, वहां अधिकारियों के साथ बैठक की, जिसमें ये सभी अधिकारी शामिल थे.

योगी ने बैठक में कहा था कोई घाट पर नहीं सोएगा
योगी ने बैठक में कहा था कोई घाट पर नहीं सोएगा, कोई बैग रखकर वहां आराम नहीं करेगा, भीड़ पर पूरा नियंत्रण होना चाहिए. तो फिर घटना के 8 घण्टे पहले प्रयागराज के कमिश्नर विश्वास विजय पंत खुद भगदड़ की बात क्यों कहते हैं? अगर उन्हें ये कहना ही था तो वो अपनी पुलिस को कहते, टीम को कहते, एसएसपी राजेश द्विवेदी को कहते. यानि यहां अधिकारियों का अपना ईगो आया, उनका कद, पद और तमाम चीज़ें हो सकती हैं. हालांकि एक सच और जिसपर दबी जुबान बात की जा रही है.

भगदड़ मचने से पहले अनाउंस कर रहे थे कमिश्नर
कमिश्नरेट किसी ज़िले में बनाया जाता है तो वहां IAS और IPS लॉबी में थोड़ा तनातनी होती है. पुलिस विभाग के कई बॉस होने के बाद भी पूरा कंट्रोल था वहां के मंडलायुक्त के पास होता है, मंडलायुक्त यानि कमिश्नर हैं IAS अधिकारी विजय विश्वास पंत, जो खुद मैदान में भगदड़ मचने से पहले अनाउंस कर रहे थे. अब यहां दो बातें समझिए, IAS मतलब सरकार का प्रतिनिधि, और IPS यानि प्रशासन का हिस्सा. दोनों का काम करने का तरीका अलग-अलग होता है. जहां कमिश्नरेट बनाया जाता है, वहां IAS की ताकत कम हो जाती है, इसका विरोध कई बार खुद IAS एसोसिएशन कर चुका है.

प्रयागराज के कमिश्नर विजय विश्वास पंत की तरह ही मेला क्षेत्र के DM विजय किरण आनंद भी तैनात थे. अब यहां पूरा का पूरा कंफ्यूज़न हो गया, मीटिंग में सीनियर अधिकारी तो ये बात समझ पाए कि किसको क्या करना है? पर मैदान में तैनात हज़ारों की संख्या में सिपाही, दारोगा और CO रैंक के अधिकारी लगता है नहीं समझ पाए, चल क्या रहा है. क्योंकि यूपी में अभी तक सिर्फ चार जिले ही कमिश्नरेट बनाए गए, यानि UP पुलिस के जवान कमिश्नरेट सिस्टम को ठीक से समझ नहीं पाए. अब कौन अधिकारी कहां, किसका बॉस है, किसका आदेश है ये सब सुनने वाली पुलिस को समझ ही नहीं आया था कि वहां भीड़ को रोकने या संभालने के लिए क्या करना चाहिए. ये मुख्य वजह मानी जा रही है जिसके कारण भगदड़ मची.