UP को नहीं बनने दिया जाएगा केरल-बंगाल, योगी सरकार का नया कानून तैयार!

Global Bharat 18 Aug 2024 03:26: PM 2 Mins
UP को नहीं बनने दिया जाएगा केरल-बंगाल, योगी सरकार का नया कानून तैयार!

अभिषेक चतुर्वेदी

एक तरफ कोलकाता केस (Kolkata rape-murder case) के आरोपी के लिए सबसे सख्त सजा की मांग हो रही है, तो दूसरी तऱफ योगी सरकार सख्त कानून लाने की तैयारी में है, जिसके बाद एनकाउंटर, उम्रकैद और गाड़ी पलटने की बात भी पुरानी हो जाएगी और जो लोग आरोपियों को बचाने की कोशिश करते हैं, उनका भी तगड़ा इंतजाम होने वाला है. क्योंकि कुछ लोग आज भी मोईद खान (Moeed Khan) और नवाब सिंह यादव (Nawab Singh Yadav) जैसे आरोपी के लिए जमानत मांग रहे हैं, एक वकील ने बकायदा याचिका दाखिल कर कहा है कि जज साहब मोईद को जेल में नहीं बल्कि बाहर होना चाहिए, इसे सुनकर जज साहब भी हैरान रह गए और सुनवाई की तारीख 22 अगस्त तय कर दी. अब 96 घंटे के भीतर यूपी पुलिस को तमाम वो सबूत जुटाने हैं, जिससे मोईद को जमानत न मिल सके.

  • सूत्र बताते हैं... यूपी पुलिस (UP Police) इस केस को मिसाल के तौर पर पेश करना चाहती है
  • हर आरोपी को सबसे सख्त सजा मिले, इसकी प्लानिंग बन रही है!
  • यूपी पुलिस की सबसे बड़ी चिंता उसकी पॉलिसी ही बन गई है
  • बुलडोजर और एनकाउंटर के बाद भी अपराधियों में वो खौफ नहीं है!
  • अब इससे भी बड़ी सजा देने का खाका तैयार किया जा रहा है
  • हालांकि मानवाधिकार संगठन के लोग इसके आड़े आ सकते हैं
  • देशभर में जितनी घटनाएं बढ़ी है उससे हर सरकार बेहद गुस्से में हैं
  • कोलकाता से लेकर उत्तराखंड और यूपी तक की घटनाएं हिला देने वाली हैं

यही वजह है कि पहले लालकिले से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ऐसे लोगों को कड़ी सजा देने की बात करते हैं, और उसके 3 दिन बाद योगी आदित्यनाथ ऐसे लोगों को जल्लाद की संज्ञा देते हैं. हर बड़े फैसले की शुरुआत चूंकि यूपी से ही होती है, इसलिए ऐसी चर्चा है कि योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) की सरकार इस बार कोई बड़ा कानून लाने की तैयारी में है, जिससे देश की आधी आबादी को इंसाफ मिल सके, वो ड्यूटी से लेकर घर तक में खुद को सुरक्षित महसूस कर सके. पर हमारे समाज की दिक्कत ये है कि ऐसी घटनाओं के बाद हम कैंडल मार्च तो निकालते हैं, कुछ दिनों तक सोशल मीडिया पर गुस्सा दिखाते हैं, लेकिन उसके बाद सब भूल जाते हैं.

पीड़िता का परिवार इंसाफ की लड़ाई लड़ते-लड़ते अकेला पड़ जाता है. जब आरोपी रसूखदार हो तो वो कुछ महीनों में जमानत पर बाहर भी आ जाता है और परिवार इस डर के साए में जी रहा होता है कि अब हमारा क्या होगा. ये जो मानसिकता है, इसे हर हाल में बदलना होगा, वरना कानून तो साल 2012 की घटना के बाद भी बने थे, कानून की कड़ियां कितनी मजूबत होंगी ये समाज की सोच से भी तय होती है, वरना इतनी बड़ी घटना के बाद कुछ लोग आरोपियों को बचाने की कोशिश नहीं करते. आरोपियों के डीएनए टेस्ट और लड़की की नार्को टेस्ट की मांग नहीं करते. ऐसे में सवाल ये भी है कि क्या सरकार जब कानून बनाएगी तो जैसे देशद्रोहियों से नाता रखने वालों पर भी एक्शन होता है. ठीक वैसे ही ऐसे आरोपियों का पक्ष लेने वालों पर एक्शन होगा. 

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