क्या है यूपी का शिक्षक भर्ती आरक्षण घोटाला, जिस पर योगी लेने वाले हैं तगड़ा फैसला!

Global Bharat 18 Aug 2024 09:20: PM 2 Mins
क्या है यूपी का शिक्षक भर्ती आरक्षण घोटाला, जिस पर योगी लेने वाले हैं तगड़ा फैसला!
  • यूपी में किसने किया आरक्षण घोटाला, जिस पर योगी को बुलानी पड़ी इमरजेंसी मीटिंग!
  • सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट तक उठे सवाल, किसने किया बाबा साहेब के संविधान का अपमान
  • OBC को 27 में से सिर्फ 3 फीसदी आरक्षण ही क्यों? सरकारी नौकरी में किसने रचा खेल?

हिंदुस्तान के 77 सालों के इतिहास में कई घोटाले हुए, लेकिन पहली बार आरक्षण घोटाले की कहानी सामने आई है, जिसने योगी की नींद उड़ा दी है, योगी अपने अधिकारियों से पूछ रहे हैं कि ये किसने किया, 18 अगस्त की शाम 5.30 बजे योगी ने बकायदा इसे लेकर शिक्षा विभाग के बड़े-बड़े अधिकारियों की मीटिंग भी बुला ली, और साफ-साफ कहा कि ये खेल नहीं चलेगा, तो सवाल है कि आखिर प्रदेश के 69 हजार युवाओं के साथ धोखा किया किसने, इसका जिम्मेदार कौन है, क्या भर्ती निकालने वाले विभाग के बड़े-बड़े अधिकारी जिम्मेदार हैं. इसे समझाएं उससे पहले सुनिए आरक्षण घोटाला क्या है, और अब योगी इस पर क्या करने वाले हैं.

क्या है आरक्षण घोटाला

  • अखिलेश यादव जब मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने 1 लाख 37 हजार शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक का दर्जा दे दिया!
  • ये केस जैसे ही सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, सरकार ने फैसले पर रोक लगा दी, वापस से सारे शिक्षक शिक्षामित्र बन गए
  • सुप्रीम कोर्ट ने 1 लाख 37 हजार भर्ती निकालने का आदेश योगी सरकार को दिया, सरकार ने दो चरणों में भर्ती निकाली
  • पहले चरण में 68 हजार 500 और दूसरे चरण में 69 हजार पदों के लिए भर्ती निकाली, सवाल दूसरे चरण की भर्ती पर उठे
  • साल 2019 में हुई भर्ती को लेकर ये कहा गया कि OBC वर्ग को 27 में से सिर्फ 3.86 फीसदी आरक्षण मिला
  • जबकि अनुसूचित जाति को 21 में से 16.6 प्रतिशत ही आरक्षण का लाभ मिला, कुल 19 हजार सीटों का घोटाला हुआ


आरक्षण का समर्थन करने वाले लोगों का ये आरोप था कि अगर कोई ओबीसी कैटेगरी का लड़का सामान्य कैटेगरी के लड़के से ज्यादा नंबर लाता है तो फिर उसे आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा, अब ये नियम किसने बनाया, कैसे इतनी सीटों पर खेल हुआ, ये जांच करना योगी सरकार का काम है, क्योंकि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ-साफ कहा है कि आपको दूसरी मेरिट लिस्ट बनानी होगी. ये वाली लिस्ट रद्द कर दी जाएगी. जिसके बाद सीएम योगी ने शिक्षा विभाग की बैठक बुलाकर साफ-साफ आदेश दिया कि अदालत के आदेशों पर विचार करें. लेकिन सवाल ये है कि जो लोग भर्ती के बाद से नौकरी कर रहे हैं, उनका अब क्या होगा. फिलहाल योगी सरकार के पास दो विकल्प हैं, पर दोनों में आगे कुआं पीछे खाई वाली स्थिति है.

पहला विकल्प है मेरिट लिस्ट रद्द करने का, लेकिन सरकार ने अगर मेरिट लिस्ट रद्द कर दी तो फिर हजारों शिक्षकों की नौकरी पर खतरा मंडराने लगेगा, वो सड़कों पर उतर सकते हैं, कानून व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति पैदा हो सकती है. 
दूसरा विकल्प है सुप्रीम कोर्ट जाने, लेकिन सरकार सुप्रीम कोर्ट में अगर याचिका दाखिल करती है तो फिर उस पर पिछड़ा विरोधी होने का आरोप लगेगा.

चंद्रशेखकर से लेकर मायावती और अखिलेश तक इस ताक में हैं कि योगी सरकार की छवि पिछड़ा विरोधी वाली बना दी जाए, लेकिन ओबीसी के बड़े चेहरे और ड़िप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने ये साफ कर दिया है कि योगी सरकार पिछड़ों और दलितों के हित में फैसला लेगी, यहां तक कि सीएम योगी की मीटिंग के बाद एक लेटर भी सामने आया, जिसमें साफ-साफ लिखा था सीएम योगी का साफ आदेश है किसी भी अभ्यर्थी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए. पर सवाल ये है कि योगी सरकार जब आरक्षण के पक्ष में थी तो फिर आरक्षण घोटाला किन लोगों ने किया. क्या सरकार उन पर भी कोई एक्शन लेगी.

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