Bengal Assembly Election Results: बीजेपी ने बंगाल में जैसे ही जीत हासिल की, बांग्लादेश से लेकर पाकिस्तान तक में हलचल मच गई. वहां रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लोग अपनी-अपनी पीड़ा गाने लगे, हैरानी जताने लगे... जबकि हिंदुस्तान में कई लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा है क्या बंगाल में योगी मॉडल लागू होगा, क्योंकि लगभग उसी मॉडल पर बीजेपी ने जीत हासिल की है, खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जीत के बाद अपने भाषण में ये कहा कि पहली कलम से आयुष्मान भारत योजना को मंजूरी मिलेगी, और घुसपैठियों पर कड़ा एक्शन लेंगे.
मोदी के इस बयान की गूंज बंगाल से बांग्लादेश तक सुनाई दे रही है, क्योंकि वहां की मीडिया मे जिस हिसाब का मातम पसरा है, वो हैरान करने वाला है... ये बांग्लादेश के चार अखबारों की हेडलाइन है, इसके अंदर जो ख़बर लिखी है, उसे पढ़कर आपको भी गुस्सा आ सकता है.. बांग्लादेशी मीडिया बंगाल में बीजेपी की जीत पर आंसू बहा रही है, उससे पहले बांग्लादेश के एक सांसद ने भी ये कहा था कि अगर बंगाल में बीजेपी जीती तो दिक्कत बढ़ जाएगी, फिर सवाल उठ रहा है क्या टीएमसी घुसपैठियों को संरक्षण दे रही थी, ये आरोप जो बीजेपी लगा रही थी, उस पर बांग्लादेश की मीडिया भी मुहर लगा रही है, क्योंकि अखबारों की हेडलाइन कुछ ऐसा ही इशारा कर रही है...
बांग्लादेश के स्थानीय अखबार, प्रथम आलो ने बकायदा बंगाल चुनाव का विश्लेषण कर लिखा, ''पश्चिम बंगाल चुनाव: सिर्फ राज्य का नहीं बल्कि भारतीय गणतंत्र का भविष्य भी संकट में है. हिंदी पट्टी का हिंदुत्व अब बंगालियों के मन में भी गहराई से बैठ गया है. वहां बीजेपी की जीत से राज्य में बड़े पैमाने पर औद्योगिकीकरण और केंद्र से फंडिंग का रास्ता खुल सकता है, जबकि इससे तृणमूल कांग्रेस के अस्तित्व पर संकट भी आ सकता है.''
अब यहां सवाल ये है बंगाल में रोजगार पैदा होगा तो फिर दिक्कत कहां है, बांग्लादेशी मीडिया इसे भारतीय गणतंत्र के लिए संकट क्यों बता रही है, क्या टीएमसी जीतती तो उनके लिए ठीक होता..
बांग्लादेशी अखबार डेली स्टार लिखता है, ''बीजेपी के प्रचार में मुस्लिम मुद्दा भी प्रमुख रहा है. बीजेपी नेता शुवेंदु अधिकारी अक्सर कहते हैं कि पश्चिम बंगाल में करीब एक करोड़ बांग्लादेशी मुसलमान और रोहिंग्या हैं. यह संख्या काफी बड़ी है, लेकिन वे हैं कहां? और वे पश्चिम बंगाल ही क्यों आएंगे, जहां से खुद लोग रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जा रहे हैं? इतनी कवायद के बावजूद, चुनाव आयोग इस पूरी प्रक्रिया में एक भी घुसपैठिए की पहचान नहीं कर पाया, जिसे प्रधानमंत्री मोदी अक्सर अपने भाषणों में कहते रहे हैं.''
जबकि बांग्लादेशी अखबार 'दैनिक इत्तेफाक' ने लिखा, ''भवानीपुर में ममता से पीछे रहने के बावजूद पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने सरकार बना ली.'' इतना ही नहीं बांग्लादेश की तरह पाकिस्तानी मीडिया भी बंगाल में बीजेपी की जीत को हैरानी के नजरिए से देख रहे है. लेकिन सवाल ये है कि चुनाव भारत का, वोटर्स भारत के, चुनाव आयोग भारत का और चुनावी प्रक्रिया भारत की, उसमें जनता ने बीजेपी को जीताया तो पड़ोसी मुल्कों को पीड़ा क्यों हो रही है. क्या घुसपैठियों के संरक्षकों को अब ये लग रहा है कि बचना मुश्किल है. बंगाल से लेकर बॉर्डर पार तक जो घुसपैठियों के आका बैठे हैं, क्या उन पर कोई बड़ा एक्शन होने वाला है, इसी का डर सबको सता रहा है या फिर रोना इस बात का है कि बंगाल में एनआरसी लागू हो गया तो घुसपैठियों का क्या होगा?