नई सरकार में अजीत डोभाल का क्या होगा? NSA के पोस्ट से होगी छुट्टी!

Global Bharat 03 Jun 2024 08:44: PM 2 Mins
नई सरकार में अजीत डोभाल का क्या होगा? NSA के पोस्ट से होगी छुट्टी!

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक मीटिंग बुलाते हैं और कहते हैं सब अगले 100 दिन का एजेंडा लेकर आइए. मीटिंग में हर कोई एक फाइल के साथ पहुंचता है पर अजीत डोभाल खाली हाथ होते हैं. मोदी उनसे वजह पूछते हैं तो कहते हैं सर मीटिंग के बाद बताऊंगा आपसे कुछ बात करनी है. मोदी औऱ डोभाल मीटिंग के बाद मिलते हैं  और फिर जो डोभाल बोलते हैं उसे मोदी सिर्फ सुनते ही रह जाते हैं कुछ हां या नहीं बोल पाते.

डोभाल कहते हैं सर, साल 1968 में मैं केरल कैडर का IPS बना. वहां से आईबी और रॉ में आया, कई देशों में रहा, हमेशा हिंदुस्तान की सेवा के लिए खुद को समर्पित रखा पर अब थोड़ा आराम चाहता हूं. डोभाल का इशारा एनएसए पद से रिटायरमेंट की ओर था. पर मोदी के सामने सबसे बड़ा सवाल ये है कि अगर डोभाल रिटायर होते हैं तो फिर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार किसे बनाया जाए.

सूत्र बताते हैं कि पांच नामों पर इसे लेकर चर्चा चल रही है. नए एनएसए को लेकर एक अप्रत्याशित फेरबदल भी देखने को मिल सकता है. मोदी सरकार के सबसे खास मौजूदा कैबिनेट मंत्री और पूर्व ब्यूरोक्रेट को भी यह पद सौंपा जा सकता है. वो 5 लोग कौन हैं, जिन्हें डोभाल वाली कुर्सी मिल सकती है.

पहले नंबर हैं डोभाल के करीबी माने जाने वाले सामंत गोयल रॉ के चीफ रह चुके हैं. पन्नू वाले मामले में अभी अमेरिका ने सामंत गोयल का ही नाम लिया था ये खुफिया मामलों के जानकार माने जाते हैं.

दूसरे नंबर हैं 1981 बैच के पूर्व IPS ऑफिसर अनिल धस्माना, ये रॉ के चीफ भी रह चुके हैं. उत्तराखंड से ताल्लुक रखने वाले अनिल धस्माना डोभाल की पसंद भी माने जाते हैं.

तीसरे नंबर हैं 1998 बैच के IPS तपन डेका, जिन्हें जून 2022 में आईबी का डायरेक्टर बनाया गया. जम्मू-कश्मीर में शांति लाने में इनकी अहम भूमिका रही है. मोदी ने इनके कई ऑपरेशन की निगरानी की है, इसलिए ये मोदी की पसंद हो सकते हैं.

चौथे नंबर हैं 1982 बैच के भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी रहे पंकज सरन सिंह पूर्व डिप्टी एनएसए हैं, इससे पहले बीएसएफ के प्रमुख भी रह चुके हैं. लेकिन इनके साथ दिक्कत ये है कि इन्हें विदेश मामलों का ज्यादा अनुभव नहीं है.

पांचवें नंबर पर हैं विक्रम मिसरी, साल 1989 बैच के भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी रहे मिसरी की गिनती जयशंकर जैसे ऑफिसर के रूप में होती है. फिलहाल डोभाल के बाद एनएसए में इनका ही आदेश चलता है. इनके पास डिप्टी एनएसए का पद है. लेकिन इनके पास इंटनरल सिक्योरिटी का अनुभव कम है.

अब मोदी किसे नया एनएसए चुनते हैं, ये देखने वाली बात होगी. ये कमेटी का मामला है कि वो किसके नाम का प्रस्ताव सरकार तक भेजती है. पर डोभाल को इतनी आसानी से रिटायरमेंट मिलने की उम्मीद नजर नहीं आती. 30 मई 2014 को डोभाल ने पहली बार एनएसए पद की शपथ ली थी. उसके बाद उन्हें 5 साल का सेवा विस्तार मिला औऱ 31 मई 2024 को उनका कार्यकाल खत्म हो चुका है और अब नए एनएसए के नाम पर मुहर लगने की बारी आ चुकी है. 

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