जब वक्त बलवान हो तो किसी को सताना नहीं चाहिए, वरना तीन माफियाओं के परिवार की तरह आपको भी कभी भी रोना पड़ सकता है, जो महिलाएं अपने पति और चाचा के दौर में आलीशान घरों में रहती थीं, उनका हाल आज ऐसा है कि वो जनता के सामने जाकर रोती हैं, रो-रोकर कहती हैं हम पर भरोसा कीजिए. इसमें पहली तस्वीर जिस महिला की है, उनका नाम इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा में है.
ये वही नसीम सोलंकी हैं, जिनके पति इरफान सोलंकी के नाम का कभी सिक्का चलता था, जिसके काम को अधिकारी और मंत्री भी कभी मना नहीं कर पाते थे, उसे योगी ने सलाखों के पीछे डाला तो पूरा परिवार एक तरह से सड़क पर आ गया, जो पत्नी आलीशान महल में रहती थी, वो जनता के सामने रोने पर मजबूर हो गई, ये तस्वीर देखकर आप अंदाजा लगा लीजिए, फिर बताते हैं बाकी के 2 माफिया और 2 महिलाएं कौन हैं, जिनका मोदी-योगी के राज में जीना मुहाल हो गया, अब परिवार की खातिर हेकड़ी तो दिखाते हैं, मूंछों पर ताव तो देते हैं, लेकिन कानून की सीमा रेखा को पार नहीं करते, क्योंकि पता है इधर कानून तोड़ा तो उधर पुलिस तोड़ डालेगी. ये हैं कानपुर की सीसामऊ सीट से सपा प्रत्याशी नसीम सोलंकी, जो रो-रोकर जनता से वोट मांग रही हैं, अल्लाह का नाम लेकर कह रही हैं, बस आखिरी बार जीता दीजिए.
ये सिंपैथी पॉलिटिक्स का गजब उदाहऱण है, लेकिन जनता तो इतनी बेवकूफ है नहीं, नसीम सोलंकी की आलीशान महल के बगल में रहने वाली नजीर फातिमा खुद ही इनके खिलाफ है, वो बीजेपी से कह रही हैं कि अगर पार्टी कहे तो मैं प्रचार को तैयार हूं. ये इरफान सोलंकी के उस आतंक की गवाह हैं, जो वहां के लोगों ने झेला है, इनका घर कैसे इरफान सोलंकी के लोगों ने उजाड़ा, ये उसकी इकलौती गवाह हैं, और घूम-घूमकर लोगों से कह रही हैं कि इरफान की पत्नी को जीताना मतलब हमारे दर्द को दोगुना करना है, ऐसी ही कई पीड़िताएं यूपी के अलग-अलग शहरों में हैं, चाहे वो मुख्तार के गढ़ गाजीपुर में देख लीजिए या अतीक के गढ़ प्रयागराज में.
अतीक की बीवी जहां भागी-भागी फिर रही हैं, तो वहीं मुख्तार की भतीजी नुसरत सियासत की खातिर मंदिर-मंदिर घुमने लगी थीं, लोगों को ये बताने लगी थीं कि चाचा ने जो किया, वो हमलोग नहीं करेंगे, हमलोग सबको साथ लेकर चलेंगे. लेकिन मुख्तार का वो गुनाह पूरा उत्तर प्रदेश कैसे भूल सकता है, जब कृष्णानंद राय के साथ बीच चौक पर उसने अपने गुर्गों के साथ मिलकर कांड किया था. पर कहते हैं वक्त सबका जवाब देता है, और इन माफियाओं के परिवार वालों को वक्त ही जवाब दे रहा है, इन्हें ये अंदाजा नहीं था कि किसी दौर में मोदी और योगी जैसे नेता आएंगे, जो देश से लेकर उत्तर प्रदेश तक में इन पर शिकंजा कसेंगे, और खुलकर कहेंगे माफिया या तो प्रदेश छोड़ दें या गलत काम छोड़ दें.
नतीजा यूपी में बड़े-बड़े माफिया निपट गए, योगी की इस सख्ती का असर बाकी प्रदेशों में भी दिखा, मध्य प्रदेश से लेकर छत्तीसगढ़ तक में बुलडोजर चला, और बिहार में जिस शहाबुद्दीन के नाम का सिक्का चलता था, वो चुनाव में इरफान सोलंकी की पत्नी की तरह ही लोगों के बीच भावुक होती नजर आईं, चुनरी ओढ़कर हिंदू वोटबैंक साधने की कोशिश तो की, लेकिन जनता ने नकार दिया.
लेकिन अभी भी यूपी अपराधमुक्त नहीं हुआ है, क्योंकि छोटे-मोटे बदमाशों ने शहर नहीं छोड़ा है, जिसकी वजह से जौनपुर में कभी किसी मां-बाप को अनुराग खोना पड़ रहा है, तो वहीं बहराइच में किसी परिवार को रामगोपाल मिश्रा को खोना पड़ रहा है, अगर ऐसे लोगों पर वक्त रहते शिकंजा नहीं कसा तो कौन कब कितना बड़ा माफिया बन जाए, कहना मुश्किल है,क्योंकि सामने कई ऐसे सियासतदान खड़े हैं, आरोपियों को ही पीड़ित बताकर उनकी मदद को तैयार रहते हैं, और सरकार बदलते ही इनकी काली दुनिया फलने-फूलने लगती है, आप ऐसे परिवारों की आंसू पर क्या कहेंगे.