जो स्वाति मालीवाल केजरीवाल को आधी रात को भी फोन कर सकतीं थीं, उन्हें केजरीवाल से मिलने से किसने रोका. उस दिन असल में केजरीवाल आवास पर हुआ क्या हुआ था, ये कहानी अब पूरी तरह से सामने आई है, जब स्वाति की मां ने एक न्यूज चैनल को अपनी बेटी के साथ हुई आपबीति के बारे में बताया है. उनकी मां ने कहा कि ये उसकी लड़ाई है, वो तभी बोलेगी, जब सही समय होगा. ऐसे समय में मीडिया मेरे साथ है, इसलिए उनका आभार प्रकट करती हूं.
इतना बोलकर स्वाति मालीवाल की मां रोने लगती हैं और फिर जो ख़बरें सामने आती है, वो दंग करने वाली थी. ख़बर है कि स्वाति मालीवाल इस बात से खुश नहीं थीं कि अरविंद केजरीवाल की जगह सुनीता केजरीवाल को सीएम के तौर पर प्रोजेक्ट किया जाए, वो केजरीवाल से मुलाकात कर ये समझाने वाली थी कि बाकी पार्टियों में और हममें क्या अंतर रह जाएगा. हमारी पार्टी तो शुरू से परिवारवाद के खिलाफ रही है.
हालांकि कुछ लोग कहते हैं कि स्वाति खुद को केजरीवाल के उत्तराधिकारी के रूप में देख रही थी और ये बात सुनीता केजरीवाल को रास नहीं आ रही थी. लेकिन जैसे ही वो केजरीवाल के घर पर पहुंचती है, केजरीवाल के पीए बिभव कुमार उन्हें रोक लेते हैं, स्वाति को इस बात का बुरा इसलिए लगता है क्योंकि स्वाति कभी बिभव कुमार की बॉस रही थी.
साल 2000 में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने परिवर्तन नाम से NGO बनाया था. दिसंबर, 2006 में यही NGO पब्लिक कॉज रिसर्च फाउंडेशन के नाम से रजिस्टर्ड हुआ. परिवर्तन रजिस्टर्ड NGO नहीं था. ये NGO अरविंद केजरीवाल ने रेमन मैग्सेसे पुरस्कार के पैसों से बनाया था. इन दोनों NGO की सर्वेसर्वा स्वाति मालीवाल थीं. केजरीवाल इसका नाम थे, तो चेहरा स्वाति थीं. और इस एनजीओ में बिभव कुमार सिर्फ एक स्टाफ थे.
इसीलिए स्वाति को ये बात अच्छी नहीं लगी कि हमारा ही जूनियर आज हमको आंख दिखा रहा है, हालांकि ये पहली कहानी थी, दूसरी कहानी ये भी है कि कांग्रेस के प्यार में सियासी रूप से धृतराष्ट्र बन चुके अरविंद केजरीवाल अपने ही लोगों को दुख दे रहे हैं, स्वाति मालीवाल फिलहाल राज्यसभा सांसद हैं, और कुछ दिनों पहले उनके पास कुछ पार्टी कार्यकर्ताओं के जरिए ये मैसेज पहुंचाया गया था कि स्वाति सीट छोड़ दें, उन्हें हम पार्टी में एडजस्ट कर लेंगे. बताया जाता है कि ये सीट अरविंद केजरीवाल का केस लड़ रहे एडवोकेट मनु सिंघवी के लिए खाली करनी है. इस पर स्वाति सीधे CM से बात करने गई थीं. अरविंद केजरीवाल को पता था कि आमने-सामने बातचीत में वे कई मुद्दे उठाएंगीं.
शायद इसीलिए केजरीवाल खुद को पर्दे के पीछे रखना चाहते थे, लेकिन बात इतनी बिगड़ेगी उन्हें नहीं पता था, और अब बिभव कुमार पर एक्शन की बात सिर्फ इसलिए हो रही है क्योंकि दिल्ली पुलिस पीसीआर डायरी में स्वाति मालीवाल की कॉल वाली बात लिखी जा चुकी है. भले ही एफआईआर दर्ज नहीं हुई है, पर पहली सूचना तो दिल्ली पुलिस को मिल चुकी है, और स्वाति का पता अगर अगले कुछ दिनों तक भी नहीं चलता है, तो फिर इस केस में सीबीआई की एंट्री हो सकती है, क्योंकि सवाल एक महिला की सुरक्षा है.