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यूपी के नगीना से सांसद चंद्रशेखर की जान के पीछे कौन पड़ा है? कौन है जो उन्हें नुकसान पहुंचाना चाहता है? 28 फरवरी को जब चंद्रशेखर मथुरा पहुंचे तो किन लोगों ने गाड़ी पर पत्थर फेंके? भीम आर्मी के समर्थक गुस्से में प्रशासन से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, जबकि प्रशासन ने नया दावा कर नया सवाल खड़ा कर दिया है. ख़बर यहां तक है कि वहां सुरक्षा व्यवस्था में लगे इंस्पेक्टर संजीव कांत मिश्रा से भी चंद्रशेखर भिड़ भी जाते हैं और कहते हैं मुझे कुछ भी हुआ तो जिम्मेदार तुम लोग होगे. तो सवाल है वो लोग कौन थे, इसे समझने के लिए चंद्रशेखर के मथुरा दौरे का पूरा शेड्यूल देखिए. 28 फरवरी को चंद्रशेखर मथुरा के तीन अलग-अलग जगहों पर जाने के लिए पहुंचा था.
पहली जगह थी- मथुरा का करनावल गांव, जहां दो दलित बहनों के साथ गांव के ही दबंग यादव परिवार के लड़कों ने अभद्रता और मारपीट की थी, उसी केस में चंद्रशेखर परिवार से मिलने पहुंचे थे.
दूसरी जगह थी- मथुरा का सिरेला गांव, जहां एक हफ्ते पहले वासुदेव बघेल नाम के व्यक्ति ने खुदकुशी कर ली थी. परिजनों को सांत्वना देने चंद्रशेखर पहुंचे थे.
जबकि तीसरी जगह थी- मथुरा का भरत नगरिया गांव- जहां एक हफ्ते पहले सवर्णों और जाटव समुदाय के लोगों के बीच अंबेडकर की प्रतिमा को लेकर विवाद हुआ था.
जैसे ही चंद्रशेखर सिरेला गांव से निकलकर भरत नगरिया की ओर जाते हैं, तभी पता चलता है परसोतीगढ़ी के पास कुछ बाइक सवारों ने चंद्रशेखर के काफिले पर हमला कर दिया. लेकिन अब इस कहानी में नया मोड़ आ गया है. मथुरा के एसएसपी ने जो दावा किया है, उसके मुताबिक हमला हुआ ही नहीं. चंद्रशेखर ने जो वीडियो अपलोड किया है.
उसी में एक अखबार की कटिंग भी है, जो मथुरा के एसएसपी शैलेश कुमार पांडेय के हवाले से लिखता है... सांसद के काफिले पर कोई हमला नहीं हुआ. इनका काफिला आगे था, पीछे किसी ने अफवाह फैला दी कि कुछ पत्थर चले. इस पर दो लोगों को समर्थकों ने पीट दिया. हल्ला मचा था कि गाड़ी पर किसी ने पत्थर मारे हैं. अब सवाल ये उठता है कि अगर हमला नहीं हुआ तो गाड़ी कैसे टूटी, और अगर ये अफवाह है तो फिर क्या पुलिस अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ एक्शन लेगी, क्योंकि चंद्रशेखर तो लंबा-चौड़ा पोस्ट लिखकर सीधा सरकार को घेर रहे हैं.
वो कह रहे हैं कि हम न डरेंगे, न झुकेंगे, न रुकेंगे. इंकलाब होगा! न्याय होगा! और सत्ता की कुर्सियाँ हिलेंगी! अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मुझे आने से रोकने के लिए ऐसा करवाया गया.
दरअसल, 1 मार्च को चंद्रशेखर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे थे, जहां वहीं के एक छात्र नेता इंजमाम उल हक ने जब चंद्रशेखर से सवाल पूछने की कोशिश की तो उसे चंद्रशेखर ने समर्थकों को रोक दिया, जिस पर भारी हंगामा मचा, कई लोग ये पूछने लगे कि एक तरफ तो चंद्रशेखर कहते हैं हमारी आवाज दबाई जा रही है. दूसरी तरफ लड़कों के सवाल से भी क्यों भाग रहे हैं.
शायद चंद्रशेखर ने 2027 की सियासत अभी से शुरू कर दी है, इसीलिए वो एक तरफ तो आजम खान के बेटे से मिलते हैं, तो दूसरी तरफ अखिलेश यादव को इशारों ही इशारों में घेर लेते हैं, जिस करनावल गांव में वो जाते हैं, वहां आरोपी यादव समुदाय के हैं, जिन्होंने दलित बहनों के साथ अभद्रता की. उनकी शादी रुकवाई, जिस पर गुस्से से लाल चंद्रशेखर ये कहते हैं बड़े नेताओं के मुंह से दो शब्द नहीं निकले, शायद इनका आपसे चुनावी रिश्ता है.