योगी के बारे में उनके विरोधी कुछ भी कहें, लेकिन RSS की गुड बुक में योगी की तस्वीर कवर पेज पर है! योगी RSS के पोस्टर ब्वॉय की तरह बन चुके हैं, जिनके बिना ना RSS का सिद्धांत पूरा होता है, ना ही बीजेपी का रास्ता? लेकिन मोहन भागवत और योगी की जब भी मुलाकात की कोशिश होती है वो रूक क्यों जाती है? लोकसभा चुनाव का दौर था. नतीजे UP में बीजेपी के ख़िलाफ़ आए, उन्हीं दिनों मोहन भागवत का गोरखपुर दौरा था. योगी और मोहन भावगत मुलाकात करेंगे, ऐसी कई ख़बरें आईं, यहां तक कि जिस वक्त भागवत गोरखपुर में थे, उस वक्त योगी भी कई बार गोरखपुर गए, लेकिन मुलाकात की कोई पुख्ता ख़बर नहीं आई, हालांकि कुछ मीडिया संस्थानों ने बिना आधार दावा किया कि मुलाकात हुई थी.
अब वाराणसी में मोहन भागवत का कार्यक्रम था. जिस वक्त भागवत वाराणसी में थे, उस वक्त योगी भी वाराणसी में ही थे, दावा किया गया कि मुलाकात होगी लेकिन मुलाकात नहीं हो पाई! सोशल मीडिया पर UP में लंबे वक्त तक अलग-अलग पार्टियों को कवर कर चुके वरिष्ठ पत्रकार लिखते हैं कि मोहन भागवत और योगी की मुलाकात नहीं हो पाई, वो X पर दावा करते हैं, सूत्र बताते हैं कि तमाम कोशिशों के बावजूद योगी आदित्यनाथ की संघ प्रमुख से मुलाकात नहीं हो पा रही है...जबकि पांच दिन के लिए संघ प्रमुख काशी में ही हैं, बीच में पीएम के कार्यक्रम के निरीक्षण के बहाने योगी जी इस दौरान काशी भी हो आए पर मुलाकात नहीं हुई, सूत्रों का तो यही कहना है, बाकी जो मृत्युंजय और शिशिर बताएं..हालांकि वाराणसी में मुलाकात तय थी या नहीं ये ख़बर ही पुष्ट नहीं है, ना ही सरकार के किसी कार्यक्रम में मोहन भागवत और योगी की मुलाकात का जिक्र था? फिर भी एक चौंका देने वाली बात सामने आई! लोकसभा चुनाव 2024 से पहले मोहन भागवत और योगी की कई मुलाकात की तस्वीरें आती थीं. यहां तक कि जब वो राम मंदिर के उद्घाटन के दौरान अयोध्या में मिले तब भी योगी-भागवत की अलग मुलाकात की चर्चा शुरू हो गई? सवाल ये है कि भागवत-योगी अगर मिल नहीं सकते हैं तो फोन पर बात क्यों नहीं हो रही है? और योगी-भागवत की मुलाकात हो भी जाएगी तो कौन सा पहाड़ टूट जाएगा?
राजनीतिक पंडित इशारा करते हैं कि योगी-भागवत की मुलाकात की ये ख़बरें मीडिया द्वारा पैदा की गई हैं, क्योंकि भागवत खुद योगी आदित्यनाथ के विचारों के साथ रहते हैं, जब बीजेपी लोकसभा चुनाव हारी तो योगी को हटाने की बातें होने लगीं, उस वक्त भागवत के दखल के बाद ही केशव गुट को समझाया गया था कि योगी नहीं हटाएं जाएंगे! जब संसद में अखिलेश यादव वक्फ़ बोर्ड कानून पर चर्चा के दौरान शाह से मज़ाकिया अंदाज़ में पूछते हैं कि योगी बाबा पर बोलिए तो शाह कहते हैं आप घबराइए नहीं, योगी ही रिपीट होंगे! RSS के कई नेताओं की मुलाकात योगी से होती रहती है, तो फिर भागवत से मुलाकात कोई रोक रहा है ये ख़बर ही सरासर ग़लत है!
वाराणसी से भागवत ने साफ संदेश दिया है कि संघ का दरवाज़ा उनके लिए खुला है जिनके आदर्श औरंगजेब और बाबर नहीं है, ये बयान तब आया जब योगी बाबर का इतिहास संभल में मिटा रहे हैं, और औरंगजेब की कब्र पर महाराष्ट्र में सियासत हो रही है.
योगी आदित्यनाथ बीजेपी के भविष्य हो सकते हैं, ये बात RSS से बेहतर कौन जानता है? फिर भी ये कहानी गढ़ने वाले कौन हैं? मोहन भागवत से योगी की मुलाकात कौन रोक सकता है? मुलाकात नहीं होना ही सियासत का संदेश है? राजनीतिक पंडित कहते हैं कि योगी जो करते हैं उसमें मोहन भागवत की सहमती होती है, क्योंकि संभल हो या फिर बुलडोज़र, बिना RSS के इशारे के संभव नही हैं, अगर मोहन भागवत और योगी की मुलाकात खुलकर होगी तो इससे RSS का भारी विरोध होगा, क्योंकि योगी अपने स्टाइल में काम कर रहे हैं, जबकि भागवत अपने राष्ट्रहित के मुद्दे पर बने है, योगी का नारा ‘बटेंगे तो कटेंगे’ RSS ने भी स्वीकार लिया था. तो सवाल ही नहीं है RSS और योगी का रास्ता अलग-अलग है!