बीजापुर, छत्तीसगढ़: 28 वर्षीय पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या की खबर ने पूरे देश को हैरान कर दिया है. मुकेश का शव 2 जनवरी 2025 को एक ठेकेदार की संपत्ति पर स्थित सीवेज टैंक में पाया गया. यह घटना उस समय सामने आई जब पुलिस मुकेश की तलाश में जुटी थी, जिन्हें 1 जनवरी को आखिरी बार देखा गया था. पुलिस के अनुसार, मुकेश को कथित रूप से भ्रष्टाचार की एक रिपोर्ट के चलते मारा गया है.
हत्या का कारण: भ्रष्टाचार का पर्दाफाश
बीजापुर पुलिस के अनुसार, मुकेश का शव एक सील किए गए सीवेज टैंक में मिला, जिसे हाल ही में कंक्रीट से ढका गया था. शुरुआती जांच में यह सामने आया कि मुकेश को एक सड़क निर्माण परियोजना में कथित अनियमितताओं का खुलासा करने के कारण जान से मारा गया. यह परियोजना गंगलोर और नेल्सनार गांव को जोड़ने वाली सड़क से संबंधित थी, जिसमें ठेकेदार सुरेश चंद्राकर समेत तीन लोगों के नाम संदिग्ध रूप से सामने आए थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुकेश ने इस परियोजना में भ्रष्टाचार और घोटाले की शिकायत की थी, जिसके बाद उसे धमकियां भी मिलीं.
परिवार की चिंता और पुलिस कार्रवाई
मुकेश के बड़े भाई, युकेश चंद्राकर, जो स्वयं एक टीवी पत्रकार हैं, ने 2 जनवरी को पुलिस में उनके लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई. पुलिस ने मोबाइल ट्रैकिंग के जरिए मुकेश की लोकेशन का पता लगाया और उसे ठेकेदार सुरेश चंद्राकर की संपत्ति पर खोज निकाला. पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए हत्या का मामला दर्ज किया और कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है.
मुख्यमंत्री का बयान
घटना के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साई ने ट्वीट कर शोक व्यक्त किया. उन्होंने कहा, "बीजापुर के युवा और समर्पित पत्रकार मुकेश चंद्राकर जी की हत्या की खबर अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है. मुकेश जी की समाज और मीडिया में अनुपूरणीय हानि हुई है. मैं पूरी तरह से इस मामले में कार्रवाई करने का आदेश दे चुका हूँ और अपराधियों को कड़ी सजा दिलवाने के लिए कदम उठाए जाएंगे."
मुकेश चंद्राकर का योगदान
मुकेश चंद्राकर ने पत्रकारिता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया था. उनके पास दस साल का अनुभव था और वह प्रसिद्ध यूट्यूब चैनल 'बस्तर जंक्शन' के संचालक थे, जिसके 159,000 से अधिक सब्सक्राइबर थे. इसके अलावा, वह एक राष्ट्रीय समाचार चैनल के लिए स्ट्रिंगर के रूप में काम करते थे. मुकेश ने 2021 में सीआरपीएफ कमांडो राकेश्वर सिंह मनहास को माओवादी हमले के बाद मुक्त कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उन्होंने बस्तर क्षेत्र में मुठभेड़ों, हमलों और अन्य घटनाओं की विस्तृत रिपोर्टिंग की थी, जिससे उनकी पहचान बनी.
मुकेश चंद्राकर की हत्या ने केवल पत्रकारिता की दुनिया को ही नहीं, बल्कि पूरे समाज को भी झकझोर कर रख दिया है. यह घटना हमें यह याद दिलाती है कि देश में पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्रता सुनिश्चित करना कितना आवश्यक है. पुलिस मामले की जांच कर रही है और उम्मीद की जा रही है कि अपराधियों को कड़ी सजा मिलेगी.