लखनऊ: ब्लैक कैट कमांडो यानि NSG कमांडो...इनके हाथ में जो हथियार हैं, इसका नाम है कॉर्नर शॉट गन...इज़राइल और अमेरिका की तकनीक पर बनी ये गन टर्न होती है. यानि अगर दुश्मन दीवार का सहारा लेकर छिपा है तो कमांडो बिना सामने आए ही निशाना लगा सकता है. अंधेरे में लेज़र लाइट का सहारा भी देती है. ये वो हथियार हैं जो स्पेशली इज़राइल ने 15 साल पहले अपने लिए तैयार किया था. हालांकि हर जवान के पास ये हथियार नहीं है. कुछ कमांडो के पास इससे भी ख़तरनाक हथियार हैं. ये है SPAS 15 गन, फ्रांस ने बनाई थी. साल 1986 से ये ख़तरनाक हथियार कमांडो के हाथों में होता है. NSG यानि नेशनल सिक्योरिटी गार्ड्स एक ऐसी फोर्स है जो इंडिया में कहीं भी किसी भी हालात को कंट्रोल कर सकती है.

NSG कमांडो प्रयागराज में हेलीकॉप्टर से भी कूद सकते हैं. NSG कमांडो में आर्मी और पैरामिलिट्री के साथ पुलिस के जवानों को भी शामिल किया जाता है. NSG को तीन पिलर में बांटा गया है. पहली यूनिट होती है....काउंटर टेरर फोर्स...यानि दुश्मन कितनी भी तैयारी से आए, NSG की काउंटर टेरर फोर्स यूनिट इलाज कर सकती है, ज़मीन से लेकर आसमान तक, ज़मीन के भीतर, या किसी भी हालात में निपटने की क्षमता होती है. जबकि NSG की दूसरी UNIT होती है. क्लोज़ प्रोटेक्शन फोर्स...यानि NSG कमांडो की वो यूनिट जो योगी आदित्यनाथ के साथ रहती है. या देश के किसी VVIP के साथ होती है. जबकि NSG में तीसरी UNIT होती है, कोई संदिग्ध बैग रखा हो और उसमें कुछ ख़तरनाक सामान हो तो NSG की बॉम्बस डिटेक्शन यूनिट जाती है.

जब कभी भी ये ऑपरेशन के लिए जाते हैं तो इसमें तीनों यूनिट भी साथ जा सकती है. प्रयागराज में योगी ने जो कमांडो उतारे है उसमें NSG की ये तीनों यूनिट है. यानि ज़मीन से लेकर आसमान तक ये 45 करोड़ भक्तों की रक्षा के लिए तत्पर होंगे. क्लोज़ प्रोटेक्शन कमांडो किसी भी हाल में पहले से भाप लेते हैं. महाकुंभ में जो रिहर्सल हो रहा है उसमें ट्रेन के भीतर की तस्वीरें देखी जा सकती हैं. जिसमें ये जवान जो बाथरूम की तरफ हथियार लेकर खड़ा है, वो NSG कमांडो की काउंटर टेरर फोर्स यूनिट का है. जिनकी ट्रेनिंग इतनी सख्त होती है कि आधे जवान पूरी नहीं कर पाते हैं. हर टीम में कम से कम 6 से 8 कमांडो होते हैं. महाकुंभ में कोई बड़ा ख़तरा मंडरा रहा है. जिसको देखते हुए योगी ने NSG कमांडो के साथ कोरस कमांडो भी उतारे हैं.

कश्मीर और नक्सली इलाकों के लिए तैयार हुई रेलवे की कोरस कमांडो यूनिट भी साथ में प्रैक्टिस कर रही है. कोरस कमांडो पांच साल पहले बनाया गया. ये अमित शाह का प्रयोग था...CRPF के बेहतर कमांडो की ऐसी ट्रेनिंग होती है कि दुश्मन देखकर भाग जाएंगे. यानि महाकुंभ में अगर ट्रेन में कोई संदिग्ध घुसने की कोशिश करता है तो फिर उसका जाना तय है. NSG कंमाडो को ब्लैक कैट कमांडो कहते हैं, और उनकी दोस्ती ब्लैक डॉग से होती है. यानि जो डॉग इनके साथ होते हैं वो बेहद ख़तरनाक होते हैं.

वो किसी भी ऑपरेशन मदद करते हैं. महाकुंभ में एयरलाइन हाईजैकिंग के साथ ही कई ख़तरे हो सकते हैं. प्रयागराज में महाकुंभ लग रहा है, जो नेपाल से बेहद सटा हुआ है. हवाई हमले की भी आशंका है. जिस वक्त NSG कमांडो मेला क्षेत्र में रिहर्सल कर रहे थे. उसी वक्त नेपाल बॉर्डर के पास सिंघम DIG ने दौरा किया. हथियारों से लैस. तकनीक से लैस. दुश्मन को सूंघ लेने की क्षमता. ईयर प्लग के ज़रिए एक दूसरे से बात करते हैं. एक NSG कमांडो 50 या 100 दुश्मन को निपटा सकता है.

NSG कमांडो की ये यूनिट इसलिए तैयार की गई है ताकि महाकुंभ में अगर कोई हमला होता है. या कोई दुश्मन घुस जाता है तो ये अपना ऑपरेशन शुरू करेंगे. ट्रेन, प्लेन, बस, ज़मीन से आसमान तक अपने स्नाइपर हथियार के साथ ये तैयार रहेंगे. योगी ने इसके पहले मुजफ्फरनगर में ATS कमांडो उतारे थे. लेकिन जब ख़तरा बड़ा हो तो NSG कमांडो को भेजा जाता है. 2008 में जब पाकिस्तान ने भारत पर हमला बोला तो NSG कमांडो को देश ने पहली बार हेलीकॉप्टर से उतरते देखा. अचूक निशानेबाज़. क्षमतावान...एकदम सुरक्षित. जान पर खेलकर भी बचाते हैं जान. इसलिए एक सलाम हमारे जवानों के नाम. जय हिन्द.