नई दिल्ली: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे के बाद एक राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. विपक्ष ने इस कदम को महत्वपूर्ण मंत्रियों जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू के एक अहम बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (बीएसी) बैठक में अनुपस्थित रहने और नड्डा के राज्यसभा में दिए गए बयान से जोड़ा है. कांग्रेस ने दावा किया कि धनखड़ नड्डा, जो सदन के नेता हैं, और संसदीय कार्य मंत्री रिजिजू के सोमवार की बीएसी बैठक में न आने से नाराज थे. हालांकि, नड्डा ने कहा कि वे दोनों महत्वपूर्ण संसदीय कार्यों में व्यस्त थे और उन्होंने इसके बारे में उपराष्ट्रपति को पहले ही सूचित कर दिया था.
बता दें कि राज्यसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी सरकारी विधायी और अन्य कार्यों के लिए समय आवंटन की सिफारिश करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. पहली बैठक दोपहर 12:30 बजे हुई थी, जिसमें नड्डा और रिजिजू सहित अधिकांश सदस्य मौजूद थे. कुछ चर्चा के बाद, बीएसी ने शाम 4:30 बजे फिर से बैठक करने का फैसला किया. हालांकि, जब दूसरी बैठक शुरू हुई, तो दोनों मंत्री अनुपस्थित थे. उनकी अनुपस्थिति में, केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन ने सरकार का प्रतिनिधित्व किया. मुरुगन ने धनखड़ से बैठक को अगले दिन के लिए पुनर्निर्धारित करने का अनुरोध किया.
सूत्रों के अनुसार, सोमवार को कमेटी की दो बैठकें हुईं, लेकिन दोनों बेनतीजा रहीं. नड्डा ने अपनी अनुपस्थिति का कारण बताते हुए कहा कि दोनों मंत्री महत्वपूर्ण संसदीय कार्यों में व्यस्त थे और उन्होंने उपराष्ट्रपति के कार्यालय को पहले ही सूचित कर दिया था. उन्होंने कहा कि किरेन रिजिजू और मैं 4:30 बजे उपराष्ट्रपति द्वारा बुलाई गई बैठक में शामिल नहीं हो सके क्योंकि हम अन्य महत्वपूर्ण संसदीय कार्यों में व्यस्त थे, और माननीय उपराष्ट्रपति के कार्यालय को पहले से सूचना दे दी गई थी. कांग्रेस ने नड्डा के राज्यसभा में दिए एक बयान पर भी आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने कहा था कि कुछ भी रिकॉर्ड पर नहीं जाएगा, केवल वही रिकॉर्ड पर जाएगा जो मैं कहूंगा. विपक्ष ने इसे उपराष्ट्रपति का "अपमान" करार दिया.
इस पर नड्डा ने स्पष्ट किया कि राज्यसभा में मैंने जो कहा कि केवल वही रिकॉर्ड पर जाएगा, वह विपक्षी सांसदों के व्यवधान पर था, न कि सभापति के खिलाफ. कांग्रेस नेता जयराम रमेश, जो बीएसी के सदस्य हैं, ने आरोप लगाया कि नड्डा और रिजिजू ने धनखड़ को उनकी अनुपस्थिति के बारे में व्यक्तिगत रूप से सूचित नहीं किया और कमेटी के सदस्य मंत्रियों के आने का इंतजार करते रहे. रमेश ने कहा कि कमेटी ने नड्डा और रिजिजू के आने का इंतजार किया, लेकिन वे नहीं आए. जगदीप धनखड़ को व्यक्तिगत रूप से नहीं बताया गया कि दोनों वरिष्ठ मंत्री बैठक में नहीं आ रहे हैं.
जयराम रमेश ने मंगलवार को एक पोस्ट में कहा कि सोमवार को दोपहर 1 बजे से 4:30 बजे के बीच कुछ बहुत गंभीर हुआ, जिसके कारण नड्डा और रिजिजू ने जानबूझकर दूसरी बीएसी बैठक में हिस्सा नहीं लिया. सोमवार शाम को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन अचानक और अप्रत्याशित रूप से उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को स्तब्ध कर दिया.
अपने कार्यकाल के अंतिम दिन, धनखड़ ने राज्यसभा की कार्यवाही की अध्यक्षता की और जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा में शामिल रहे. बीएसी के अलावा, उन्होंने विपक्षी नेताओं से भी मुलाकात की, लेकिन उन्होंने किसी स्वास्थ्य समस्या या इस्तीफे की योजना का कोई संकेत नहीं दिया. 74 वर्षीय धनखड़ ने अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति का पद संभाला था और उनका कार्यकाल 2027 तक था.
अपने कार्यकाल के दौरान, राज्यसभा के सभापति के रूप में उन्होंने विपक्ष के साथ कई बार तीखी नोकझोंक का सामना किया. विपक्ष ने उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव भी लाया था, जो स्वतंत्र भारत में किसी सिटिंग उपराष्ट्रपति के खिलाफ पहला था. हालांकि, यह प्रस्ताव बाद में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने खारिज कर दिया था. धनखड़, वीवी गिरी और आर वेंकटरमण के बाद भारत के तीसरे उपराष्ट्रपति हैं, जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले इस्तीफा दिया. गिरी और वेंकटरमण ने राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए इस्तीफा दिया था.