10 हजार करोड़ के घोटाले के आरोपी और महिलाओं के दुश्मन नंबर 1 शाहजहां शेख को ममता बनर्जी की सरकार सीबीआई को क्यों नहीं सौपना चाहती थी, इसका सबसे बड़ा राज जब सुनेंगे तो पैरों तले जमीन खिसक जाएगी। 150 के मोह में ममता ने कैसे जिंदगी की सबसे बड़ी गलती की है, वो राज आपको बताएं उससे पहले सुनिए बांग्लादेश से मछुआरा बनकर आया शाहजहां शेख कैसे ईंट भट्ठे पर मजदूरी करते-करते एक मुख्यमंत्री का करीबी बन गया।
पश्चिम बंगाल में एक जिला पड़ता है, उत्तर 24 परगना, ये जिला बांग्लादेश की सीमा से लगता हुआ है, वहीं 90 के दशक में एक लड़का बांग्लादेश से हिंदुस्तान आता है। सबसे पहले मछुआरे का काम करता है, फिर खेतों में मजदूरी करने लगता है, वहां ज्यादा मुनाफा नहीं मिलता तो ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करने लगता है। और यहीं मजदूरी करते-करते उसने मजदूरों की एक यूनियन बनाई। और साल 2004 में सीपीआई (एम) के साथ जुड़ गया। तब इसकी उम्र सिर्फ 22 साल थी। ये वो दौर था जब उसके मामा मोस्लेम शेख पंचायत प्रमुख बन चुके थे। सियासत की सीढ़ियां चढ़ना आसान थीं।
इसीलिए शाहजहां शेख ने पहले उत्तर 24 परगना जिले के टीएमसी अध्यक्ष ज्योतिप्रियो मलिक से नजदीकियां बढ़ाई और फिर टीएमसी ने धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत करता चला गया। जब ज्योतिप्रियो को मंत्री बनाया गया तो शाहजहां की अपने इलाके में मनमानी बढ़ गई, ममता सरकार कुछ इसलिए नहीं कहती थी कि क्योंकि शाहजहां पर एक्शन का मतलब था अपना वोट बैंक खो देना। पर कहते हैं जनता की सब्र की सीमा जब टूट जाए और पाप का घड़ा भर जाए तो बचना मुश्किल हो जाता है।
10 हजार करोड़ के राशन वितरण घोटाले में शाहजहां शेख पर शिकंजा कसना शुरू हुआ, पर इसने अपने लोगों की बदौलत ईडी की टीम को ही घेरवा लिया, क्योंकि इसे पता था ममता बनर्जी यमराज को छोड़कर हर संकट से उसे बचा सकती हैं, लेकिन हाईकोर्ट ने जब सख्ती अपनाई तो 58 दिन बाद बंगाल पुलिस ने इसे गिरफ्तार किया, लेकिन वो गिरफ्तारी महज एक दिखावा थी, अदंर जेल में इसे हर ऐशो-आराम मिल रहा था, आखिर में हाईकोर्ट ने इसे सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया, पर ममता बनर्जी सरकार इस पर राजी नहीं थी।ॉ
सीबीआई के अधिकारी घंटों इंतजार करते रहे पर उन्हें शाहजहां शेख की कस्टडी नहीं मिली, लंबे ड्रामे के बाद जब अदालत की अवमानना का डर दिखा तो आखिर में इसे सीबीआई को सौंप दिया गया, लेकिन लोगों के मन में सवाल यही था कि आखिर ममता सरकार इसे बचा क्यों रही है तो इसकी एक नहीं बल्कि कई वजह हैं।
बंगाल में इस बात की चर्चा आम हो चली है कि टोपीवाली सियासत की चक्कर में ममता बनर्जी ने सिंदूर वाली महिलाओं का ऐसा अपमान किया है कि प्रदेश की जनता टीएमसी को कभी माफ नहीं करेगी। अब सीबीआई के सामने शाहजहां कितने राज उगलता है, और बांग्लादेश वाले कनेक्शन पर क्या बताता है, ये देखने वाली बात होगी।