Mamata Banerjee: बंगाल में चुनाव होने से पहले ही ममता सरकार क्या गिरने वाली है. कौन है वो करीबी जिसने दीदी की नाव में सुराख कर दिया है और नौबत आ गई है TMC में तख्ता पलट की. बंगाल की ममता सरकार को एक बार फिर मुश्किलों के सामना करना पड़ सकता है. क्योंकि TMC में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. पार्टी में ही दो फाड़ की नौबत आ जाती है. इसके जिम्मेदार हो सकते हैं ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी. जो इस समय TMC में राष्ट्रीय महासिचव हैं. इन्हीं अभिषेक को ममता बंगाल में TMC की कमान सौंप कर खुद इंडिया गठबंधन की नेता बनने का सपना देख रही थीं. लेकिन अब लग रहा है कि ममता का सपना चकनाचूर हो जाएगा. क्योंकि अभिषेक ने ममता के अपनी राहें जुदा करने का मन बना लिया है.

अब सवाल उठ रहे हैं इस पूरे प्लान के पीछे कौन है. किसके कहने पर अभिषेक ने दीदी से बगावत की है. दोनों के बीच आने वाली दरार की वजह क्या है. और क्या अब बंगाल की TMC सरकार 5 साल पूरे करने से पहले ही गिर जाएगी. दरअसल आरजीकर विवाद के बाद से ही ममता बनर्जी के खास नेताओं ने अभिषेक से किनारा करना शुरू कर दिया था.. जिसकी तस्वीरें तब साफ हुईं जब बंगाल में आरजीकर कांड का विरोध करने वाले कलाकारों के कार्यक्रमों को TMC नेताओं ने रोकना शुरू किया. इस दौरन एक स्थानीय टीएमसी पार्षद ने सिंगर लग्नजिता चक्रवर्ती के कार्यक्रम को रद्द कर दिया.. उसके बाद गायिका देबलीना दत्ता के भी करीब 4 कार्यक्रमों को रद्द किया गया. जिसकी वजह थी कि इन्होंने आरजीकर विरोध में भाग लिया था.

इसके बाद TMC प्रवक्ता कुणाल घोष ट्वीट पोस्ट में लिखते हैं...लोग विरोध करने के लिए स्वतंत्र हैं और कलाकारों को मार्च करने का अधिकार है. लेकिन जो कलाकार जानबूझकर अपमानजनक बयान देते हैं, मुख्यमंत्री, सरकार और पार्टी पर हमले करते हैं, सरकार को गिराने की बात करते हैं, और टीएमसी समर्थकों का अपमान करते हैं, उन्हें टीएमसी द्वारा आयोजित किसी भी कार्यक्रम में मंच पर नहीं आना चाहिए. उनका बहिष्कार किया जाना चाहिए. अगर किसी टीएमसी नेता को इस पर संदेह हो, तो उन्हें सीनियर लीडरशिप से परामर्श करना चाहिए. पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए.
इस बयान के बाद अभिषेक 2 जनवरी को एक कार्यक्रम के दौरान कहते हैं...क्या किसी ने पार्टी की ओर से ऐसा कहा? क्या आपने कोई नोटिस देखा है? क्या ममता बनर्जी या मैंने बतौर राष्ट्रीय महासचिव के रूप में, कुछ कहा है?” अभिषेक ने यह भी कहा कि वह किसी को यह नहीं बताना चाहते कि वह कहां गाएंगे, किसके साथ गाएंगे, या कब गाएंगे. उन्होंने कहा, “हर किसी को अपनी स्वतंत्रता है.” इसी बयान के बाद ममता और अभिषेक के नेताओं में दूरी देखी जाने लगी और कुणाल घोष एक बयान और देते हैं जो कि अभिषेक के लिए किसी चेतावनी की तरह था.
इसमें कहा जाता है कि विरोध-प्रदर्शन और विरोध के नाम पर प्लानिंग के साथ की गई अशिष्टता में अंतर होता है. टीएमसी कार्यकर्ताओं की अंतरात्मा इस मामले का निर्णय करेगी. और इस संबंध में जो कुछ भी पार्टी की शीर्ष नेता, चेयरपर्सन ममता बनर्जी कहेंगी, जो इस मुद्दे पर सबसे अधिक हमले और साजिशों का सामना कर चुकी हैं, वही अंतिम शब्द होगा.
कुणाल के इस बयान को साफ तौर पर ममता के शब्दों की तरह देखा जा रहा है. और इसके बाद ममता-अभिषेक के बीच भी दरार बढ़ने लगी है. राजनीतिक पंडित कहन लगे हैं कि दोनों नेताओं के बीच तनाव अगर खत्म नहीं हुआ तो फिर TMC में भी दो फाड़ हो सकते हैं. जिसका सीधा फायदा बीजेपी को बंगाल चुनाव में मिलेगा. और जिस तरह से बीजेपी बंगाल में एक्टिव है तो वो इस मौके को जरूर भुनाना चाहेगी.. हालांकि अभी चुनाव में समय है तो देखना होगा कि बुआ भतीजे की लड़ाई का अंत क्या होता है?