रांची: झारखंड सरकार द्वारा JSSC-CGL परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है. करीब 2000 सफल अभ्यर्थी मंगलवार को सचिवालय के बाहर प्रदर्शन पर उतर आए. वे अपनी नौकरी खोने के डर से नाराज हैं.
सरकार ने सोमवार रात कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद JSSC-CGL परीक्षा और 2014 से TSR डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा आयोजित सभी भर्ती परीक्षाएं रद्द करने का ऐलान किया था. यह लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग थी. लेकिन चयनित उम्मीदवारों का कहना है कि बिना किसी सबूत के उन्हें सजा नहीं दी जानी चाहिए.
एक अभ्यर्थी ने कहा, “बताओ हमारा क्या जुर्म है? हमें बाहर मत निकालो.” सहायक अनुभाग अधिकारी कौशल कुमार ने बताया कि वे कोर्ट के आदेश के बाद नियुक्त हुए हैं. उन्होंने सीबीआई जांच की मांग की और कहा कि दस्तावेजों के साथ आए हैं.
चंदा कुमारी ने कहा, “लोकतंत्र में 100 दोषी छूट सकते हैं, लेकिन निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए.” कई अभ्यर्थियों ने केंद्रीय नौकरियां छोड़कर यहां जॉइन किया था. वे उम्र सीमा पार होने की भी चिंता जता रहे हैं.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के फैसले के बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने 16 दिन की भूख हड़ताल समाप्त कर दी और इसे बड़ी जीत बताया. सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में सुधार के लिए समिति गठित करने का भी ऐलान किया है.