ममता बनर्जी कैसे एक डॉक्टर बिटिया को न्याय दिलाने की बजाय पैंतरा बदल रही हैं, देश का ध्यान भटकाना चाह रही हैं, वो आप इस बयान से समझ सकते हैं, 24 घंटे पहले तक जो देश ये कह रहा था कि डॉक्टर बिटिया को इंसाफ मिलना चाहिए, उसी देश के नेता अब ममता बनर्जी से ये पूछने लगे हैं कि आप ऐसे धमकी कैसे दे सकती हैं, मतलब पूरा मुद्दा ही 24 घंटे में बदल गया. पहले हिमंता बिस्वा सरमा ममता दीदी से पूछते हैं आपकी हिम्मत कैसे हुई, ऐसा कहने की, उसके बाद अब यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने ममता बनर्जी को धाकड़ जवाब दिया है. पहले वो जवाब सुनिए, फिर बताते हैं वो 3B फॉर्मूला क्या है, जिसमें बंगाल का इलाज छिपा है.
सीएम योगी लिखते हैं...सरकार का अधिनायकवादी, नारी विरोधी आचरण निःसंदेह लोकतंत्र को लज्जित, मानवता को अपमानित और सभ्य समाज को शर्मसार करने वाला है. देवी पूजा की संस्कृति को धारण करने वाली पावन धरा 'आमार शोनार बांग्ला' में मातृशक्ति की सुरक्षा में पूर्णतः असफल वहां की सरकार को समूची मातृशक्ति और देश से अविलंब माफी मांगनी चाहिए.
ममता दीदी का गुस्सा देखकर नहीं लगता कि वो माफी मांगेंगी, उनकी बातें सुनकर ऐसा लगता है जैसे वो पूरे देश को मेवात, जहांगीरपुरी और कानपुर की वो तस्वीरें याद दिलाना चाहती हैं, जब हालात बिगड़े थे, वो हल्द्वानी का वो हाल लगता है बताना चाहती हैं, जब पुलिस-प्रशासन भी कुछ नहीं कर पा रहा था. इन जगहों पर रोहिंग्याओं और बांग्लादेशियों के हाथ होने की बात सामने आई तो हर कोई यही पूछ रहा था कि ममता दीदी इन पर इतना मेहरबान क्यों हैं, और अब जब ममता बनर्जी इस तरीके की बातें कर रही हैं तो क्या इन्हीं लोगों के भरोसे वो इतनी बड़ी धमकी दे रही हैं, क्योंकि देश के अलग-अलग हिस्से में ये लोग कैसे छिपे हैं, हर कोई जानता है.
फिर सवाल ये उठता है कि नेताओं की इस तरह की बयानबाजी का खामियाजा आम जनता क्यों भुगते, पूरा बंगाल आज एक सुर से बुलडोजर पॉलिसी की मांग कर रहा है, हमने भी जब रिसर्च की तो पता चला बंगाल का इलाज 3B के फॉर्मूले से हो सकता है. जिसमें अगर ये तीन फॉर्मूला ममता बनर्जी आज भी अपना लें तो शांति आ जाएगी, संजय रॉय जैसे लोग जो बेखौफ होकर घटना को अंजाम देते हैं, संदीप घोष जैसे लोग जिन्हें लगता है कुछ भी करके बच जाएंगे, वो सब बुलडोजर के डर से बाप-बाप करने लगेंगे, और बंगाल में जिस हिसाब से योगी की डिमांड बढ़ी है, वो साफ बताता है वो प्रदेश भी यूपी की तरह अब एक बाबा मांग रहा है, जहां किसी भी घटना के बाद न्याय में वक्त नहीं लगे. यूपी के बुलंदशहर के बल्लू को अगर 13 दिन में उम्रकैद की सजा मिल सकती है तो बाकी प्रदेश के आरोपियों को क्यों नहीं.
कहते हैं पुलिस अगर चाह ले तो आरोपी को पाताल से भी ढूंढ निकालती है, लेकिन बंगाल पुलिस शुरुआत से इस केस में जो कर रही है, उसे देखने के बाद सिर्फ देशवासियों को ही नहीं, महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भी गुस्सा आ रहा है, और हो सकता है आने वाले दिनों में राष्ट्रपति शासन जैसा सख्त कदम भी उठा लें, लेकिन राष्ट्रपति शासन किसी भी राज्य की हालत का परमानेंट इलाज नहीं होता, इसीलिए बंगाल को बदलना है तो फिर एक ऐसा मॉडल लाना होगा, जहां हर अपराधी के मन में ऐसा डर हो कि वो कुछ भी करने से पहले सौ बार सोचे और उसके दिमाग में ये जरूर खौफ पैदा होना चाहिए कि गलती करूंगा तो बचूंगा नहीं चाहे उसका आका कितना भी बड़ा आदमी क्यों न हो.