लखनऊ: बदलते मौसम, बढ़ते तापमान और प्रदूषण की चुनौतियों से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक महत्वाकांक्षी मास्टर प्लान तैयार किया है. 'विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश 2047' के विजन के तहत प्रदेश सरकार ने वर्ष 2047 तक राज्य के हरित आवरण (Green Cover) को 20 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है.
वर्तमान में उत्तर प्रदेश का हरित आवरण मात्र 9.96 प्रतिशत है. सरकार ने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए 2030 तक इसे 15 प्रतिशत करने का मध्यवर्ती लक्ष्य भी तय किया है. यूपी सरकार की रणनीति सिर्फ पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे जन-आंदोलन बनाने पर जोर है. हर वर्ष 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया है.
पिछले 10 वर्षों में 282 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं. अगले 5 वर्षों में अतिरिक्त 175 करोड़ पौधे लगाने की योजना है. वन विभाग के अनुसार, इन पौधों के विकसित होने पर लगभग 72 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड के अवशोषण की क्षमता बढ़ेगी, जो जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मददगार साबित होगी.
विकास और पर्यावरण का संतुलन
सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार का मानना है कि सच्चा विकास तभी संभव है, जब विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बना रहे. पौधारोपण को अब सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व और जनभागीदारी का अभियान बनाया जा रहा है. वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने कहा कि पौधे सिर्फ पर्यावरण नहीं, बल्कि जीवन का निवेश हैं. एक परिपक्व पेड़ लंबे समय तक ऑक्सीजन, भूजल संरक्षण, मिट्टी संरक्षण और जैव विविधता की रक्षा करता है.
सरकार सितंबर तक विभिन्न विषय-आधारित पौधारोपण कार्यक्रम चला रही है, ताकि अभियान को और प्रभावी बनाया जा सके. यह पहल न सिर्फ आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और हराभरा उत्तर प्रदेश सुनिश्चित करेगी, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, शहरों में प्रदूषण कम करने और समग्र पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाएगी.