नई दिल्ली: दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के करीब 100 पूर्व छात्रों, छात्रों, फैकल्टी और स्टाफ ने कड़ी निंदा की है. उन्होंने पुलिस क्रूरता, अवैध हिरासत और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया है.
बयान में कहा गया, “हम सभी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस क्रूरता, अवैध हिरासत और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन की कड़ी निंदा करते हैं.” उन्होंने सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करने, शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार सुनिश्चित करने और कानूनी सहायता तक पहुंच देने की अपील की. साथ ही जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराने की मांग की.
हार्वर्ड लॉ स्कूल के पूर्व छात्र और सीनियर एडवोकेट शादान फरासत के साथ हुई बदसलूकी पर भी एकजुटता जताई गई. बयान के अनुसार, फरासत शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी की हिरासत रोकने की कोशिश में पुलिस द्वारा मैनहैंडल किए गए. हार्वर्ड केनेडी स्कूल से जुड़ी मेहर पसरीचा को भी लक्ष्मी नगर मार्केट में नाश्ता करते समय हिरासत में लिया गया और 13 घंटे बिना किसी दस्तावेज या कारण बताए रोके रखा गया.
ये प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और छात्र संगठनों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किए गए थे. पुलिस ने बड़े पैमाने पर सुरक्षा व्यवस्था की, 7,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया. मेट्रो स्टेशन बंद किए गए और कई ट्रेनें रद्द हुईं.
हार्वर्ड समुदाय ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और कानून के शासन की रक्षा की अपील की है. बता दें कि इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने ICFAI से बिजनेस फाइनेंस और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के हार्वर्ड इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (HIID) से एनवायरनमेंटल इकोनॉमिक्स की पढ़ाई की है.