मुंबई: देश के अलग-अलग हिस्सों में अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई जारी है. इसी क्रम में मुंबई में घाटकोपर पुलिस ने 13 अवैध बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया है. ये सभी बांग्लादेशी नालासोपारा में रह रहे थे. पुलिस ने शुरुआत में एक बांग्लादेशी को पहले गिरफ्तार किया गया था. जांच के दौरान 13 और बांग्लादेशी मिले हैं. पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर लिया है. ये सभी नागरिक नालासोपारा में अवैध रूप से रह रहे थे. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कुछ दिन पहले बांग्लादेश के एक नागरिक ने भिवंडी में 500 रुपये देकर फर्जी आधार कार्ड बनवा लिया था.
इसके बाद वह भारतीय होने का दावा करते हुए पुणे में बस गया. चार रोहिंग्याओं के साथ वह जुलाई में म्यांमार से बांग्लादेश आया था. इसके बाद बांग्लादेश से सीधे पुणे के देहुर रोड इलाके में गांधीनगर आ गया. पिंपरी चिंचवड़ पुलिस की एटीएस को जानकारी मिली कि ये चारों लोग इलाके में अवैध रूप से रह रहे हैं. इसके बाद पुलिस ने इन चारों के खिलाफ कार्रवाई की. लेकिन उनमें से एक एम. खान ने पुणे में 80 हजार रुपये में एक जगह खरीदी और उस जगह पर घर बनाकर अपना जीवन शुरू किया. जैसे ही पुलिस को सूचना मिली तो पुलिस ने उसके खिलाफ कार्रवाई की.
गौरतलब है कि फर्जी पासपोर्ट गिरोह के मास्टरमाइंड मनोज गुप्ता को कुछ दिन पहले पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार किया था. वह दस साल से अधिक समय से टूर-ट्रैवल व्यवसाय की आड़ में पासपोर्ट धोखाधड़ी का कारोबार चला रहा था. वह अब तक 100 से ज्यादा बांग्लादेशी नागरिकों को जाली भारतीय पासपोर्ट के जरिए विदेश भेज चुका है. वहीं तमिलनाडु में छह बांग्लादेशी नागरिकों को बिना किसी वैध दस्तावेज के राज्य में रहने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. ये गिरफ्तारियां तिरुपुर जिले के पल्लदम में की गईं.
पल्लदम पुलिस अधिकारियों के अनुसार, उन्हें इलाके में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के बारे में सूचना मिली थी. सूचना पर कार्रवाई करते हुए, पुलिस ने एक घर पर छापा मारा और वहां रहने वालों को पूछताछ के लिए थाने ले आई. जांच के दौरान, यह पुष्टि हुई कि वे बांग्लादेशी नागरिक थे. गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की पहचान रावन अली (36), हरीरुल इस्लाम (26), रहमान (20), सोहेल इस्लामी (20), सबीपुल इस्लाम (40) और अब्दुल हुसैन (27) के रूप में हुई है. आगे की पूछताछ में पता चला कि वे वैध दस्तावेजों के बिना रह रहे थे और निर्माण और होजरी कंपनियों में कार्यरत थे.
उनके पास भारत में रहने के लिए कोई वैध कागज या दस्तावेज नहीं था. एक सूत्र ने बताया कि तिरुपुर जिले के पल्लदम के पास महालक्ष्मी नगर इलाके में पल्लदम पुलिस को सूचना मिली थी कि बांग्लादेशी नागरिक बिना उचित दस्तावेजों के रह रहे हैं. सूचना के अनुसार, पुलिस ने इलाके के एक घर की जांच की और वहां रहने वालों को पूछताछ के लिए थाने ले आई. पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया.
इसके बाद उन्हें चेन्नई की पुझल जेल भेज दिया गया. गौरतलब है कि तिरुपुर अपने निटवियर उद्योग के लिए प्रसिद्ध है, जिसका 2024 में सालाना कारोबार करीब 40,000 करोड़ रुपये था. इस उद्योग में करीब आठ लाख कर्मचारी काम करते हैं, जिनमें से करीब तीन लाख उत्तर भारतीय राज्यों, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों से हैं. शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के पतन के बाद से पड़ोसी देश में अशांति को देखते हुए भारत-बांग्लादेश सीमावर्ती इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है. देश भर में बड़ी हिंसा की खबरें भी आई हैं, जिसमें अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है.
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