देश में सबसे पहले नेहरू राज में हुई थी वोट चोरी! मौलाना के लिए नियमों की उड़ा दी थीं धज्जियां, जानिए पूरी कहानी

Rahul Jadaun 17 Oct 2026 07:31 PM 1 Mins
देश में सबसे पहले नेहरू राज में हुई थी वोट  चोरी! मौलाना के लिए नियमों की उड़ा दी थीं धज्जियां, जानिए पूरी कहानी

नई दिल्ली: पिछले कुछ समय से देश में एक मुद्दा छाया हुआ है, जिसका नाम है वोट चोरी, कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने इसकी शुरूआत की, हालांकि वो कभी न्यायलय को या देश को सटीक सबूत नहीं दे सके, आरोप सिर्फ बातों से बातों तक ही सीमित रहे. लेकिन अब कॉकरोच पार्टी नाम का संगठन में भी इन्हीं आरोपों को लेकर आंदोलन पर उतारू है, हालांकि अक्सर आंदोलन के नाम पर अराजकता ही दिखाई देती है. लेकिन क्या है वोट चोरी? कैसे, कब और किसने इसकी शरूआत की, ये कहानी हम आपको बताते हैं.

साल था 1952 का, आजाद हिंदुस्तान में पहला लोकसभा चुनाव हो रहा था, यूपी के रामपुर से मौलाना अबुल कलाम आजाद और विशन चंद्र सेठ के बीच कड़ी टक्कर थी. जब चुनावी नतीजे आए तो विशन चंद्र सेठ करीब 20 हजार वोट से विजेता घोषित किए गए. उनके लोग जश्न मनाने के लिए जुलूस निकालने की तैयारी करने लगते हैं, डीएम और रिटर्निंग ऑफिसर भी जीत का ऐलान कर चुके थे. तभी तात्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू तक ये ख़बर पहुंचती है और वो यूपी के मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत को टेलीफोन कर कहते हैं.

“मौलाना आजाद को चुनाव हारने नहीं चाहिए.' जिस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि 'अब तो रिजल्ट घोषित हो चुका है' तो पंडित नेहरू ने कहा कि 'ये मैं नहीं जानता हूं. अगर मौलाना अबुल कलाम चुनाव नहीं जीतेंगे तो आप मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे.”

आनन-फानन में गोविंद वल्लभ पंत अपने अधिकारियों से बात करते हैं और फिर रामपुर के डीएम तक संदेश पहुंचता है, जहां डीएम साहब कहते हैं ये कैसे हो सकता है, मैं खुद ही परिणाम घोषित कर चुका हूं...पर आखिर में डीएम को जब ये कहा जाता है कि

“अगर ऐसा नहीं हुआ तो न पंत जी की नौकरी रहेगी, न मेरी नौकरी रहेगी और आपकी भी नौकरी नहीं रहेगी”

जिसके बाद दोबारा मतगणना का आदेश जारी होता है. और उसमें ऐसा खेल रचा जाता है कि लंबे वक्त तक किसी को इसकी भनक नहीं लगी. ये दावा हम नहीं कर रहे बल्कि उस समय के इंफॉर्मेशन डायरेक्टर शम्भुनाथ टंडन के किताब के हवाले से जी न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में किया है. लेकिन इस बात का जिक्र बेहद कम सुनाई देता है, तो सवाल है आखिर क्यों ? वोट चोरी किसी भी दौर में हुई हो, वो गलत है, और उसे गलत कहा जाना चाहिए.

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