नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कॉकरोच गैंग और विपक्ष को खुली चेतावनी दी है। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा है कि हिन्दुस्तान को बांग्लादेश समझने की गलती न करें। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर तीखा हमला बोलते हुए रिजिजू ने लिखा, "बड़े आए 'रिजीम चेंज' करने वाले! कान खोलकर सुन लो, भारत बांग्लादेश नहीं है।"
केंद्रीय मंत्री ने देश के युवाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि भारतीय युवा किसी के बहकावे में आने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा, "भारतीय युवा मूर्ख नहीं हैं। वे भारत का निर्माण करेंगे, उसे बर्बाद नहीं करेंगे। देश के सच्चे नौजवान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीत रहे हैं, स्किलिंग, इनोवेशन, स्टार्टअप्स और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में तिरंगा लहरा रहे हैं और सांस्कृतिक पहचान को आगे बढ़ा रहे हैं।"
क्यों गरमाया 'रिजीम चेंज' का मुद्दा?
किरेन रिजिजू का यह तीखा बयान उस समय सामने आया है जब विपक्षी खेमे और वामपंथी छात्र संगठनों की ओर से लगातार 'रिजीम चेंज' यानी सत्ता परिवर्तन के बयान आ रहे हैं।
नेहा बोरा का बयान: ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट के राष्ट्रीय सम्मेलन में बांग्लादेश के छात्र आंदोलन की खुलकर तारीफ की थी। उन्होंने कहा था कि भारत में दिखने वाले 'Gen-Z' आंदोलन की प्रेरणा बांग्लादेश से मिली है, जिसने लोकतंत्र के लिए रास्ता दिखाया।
प्रशांत भूषण की हुंकार: दिल्ली में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने दो टूक कहा था, "यह रिजीम चेंज की लड़ाई है और हम तानाशाही स्वीकार नहीं करेंगे। हम इसे करके दिखाएंगे।" उन्होंने इसे नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार करार दिया था।
पवन खेड़ा का पलटवार: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयानों का जवाब देते हुए कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने 1977 के आंदोलन का हवाला दिया था। खेड़ा ने कहा था कि विपक्ष का मकसद लोकतांत्रिक और चुनावी रास्ते से व्यवस्था और सरकार को बदलना है, ताकि देश गलत दिशा में न जाए।
विपक्ष और विभिन्न संगठनों द्वारा पड़ोसी देश की अशांति और छात्र विद्रोह की मिसालें दिए जाने पर अब केंद्र सरकार और बीजेपी ने कड़ा रुख अपना लिया है, जिसके चलते यह सियासी घमासान और तेज हो गया है।