Who is Tushar Kumar: ब्रिटेन में भारतीय मूल के एक युवा ने कम उम्र में ही एक नया रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है. हरियाणा के रोहतक से जुड़े 23 साल के तुषार कुमार को एल्स्ट्री और बोरहमवुड टाउन काउंसिल का मेयर चुना गया है. इस सफलता के साथ वे ब्रिटेन के सबसे कम उम्र के भारतीय मूल के मेयर बन गए हैं.
एक वोट से बदला मुकाबला
तुषार ने लेबर पार्टी की ओर से चुनाव लड़ा और कुल 832 वोट हासिल किए. लेकिन सबसे रोचक बात यह रही कि उन्होंने कंजर्वेटिव उम्मीदवार को महज एक वोट के अंतर से हराया. इस सीट पर पिछले करीब 30 साल से कंजर्वेटिव पार्टी का कब्जा था, लेकिन इस बार युवा चेहरे ने इतिहास रच दिया. दोबारा मतगणना के बाद नतीजा और भी साफ हो गया.
तेज राजनीतिक सफर
सिर्फ तीन साल पहले, 20 वर्ष की उम्र में तुषार किंग्स कॉलेज लंदन में पढ़ते हुए काउंसलर बने थे. अब मात्र 23 साल में मेयर पद तक पहुंचकर उन्होंने अपनी क्षमता का लोहा मनवा लिया है. वर्तमान में वे यूसीएल (UCL) में पॉलिटिकल इकॉनमी विषय में मास्टर डिग्री करने की तैयारी कर रहे हैं. पढ़ाई के साथ-साथ वे अपनी सार्वजनिक जिम्मेदारियों को भी पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं.
परिवार का मिला साथ
उनकी मां परवीन रानी भी राजनीति में सक्रिय हैं. उन्होंने हर्ट्समेरे बरो काउंसिल का चुनाव जीता था और डिप्टी मेयर का पद भी संभाला है. परिवार शिक्षा और समाजसेवा की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए राजनीति में भी अपनी पहचान बना रहा है.
ब्रिटेन तक का सफर
तुषार मूल रूप से हरियाणा के रोहतक जिले के हैं. 10 साल की उम्र तक वे भारत में रहे, इसके बाद परिवार के साथ ब्रिटेन चले गए. आज भी वे भारत से गहरा लगाव रखते हैं और समय-समय पर यहां आकर युवाओं को प्रेरित करते रहते हैं.
समाजसेवा में रुची
काउंसलर के रूप में उन्होंने अपने इलाके में पहली बार दिवाली उत्सव का आयोजन किया, जो अब हर साल बड़े पैमाने पर मनाया जाता है. वे स्थानीय समुदाय, चैरिटी कार्यों और सामाजिक कार्यक्रमों में लगातार सक्रिय रहते हैं. तुषार कहते हैं कि भारतीय मूल के ऋषि सुनक को प्रधानमंत्री बनते देखकर उन्हें बहुत प्रेरणा मिली. वे चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा युवा राजनीति और समाजसेवा की दिशा में आगे आएं.
मेहनत की मिसाल
तुषार कुमार की यह उपलब्धि उम्र को बाधा न मानने और सपनों को मेहनत से पूरा करने का बेहतरीन उदाहरण है. यह कहानी दिखाती है कि सही दिशा, लगन और आत्मविश्वास के साथ कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है. भारतीय युवाओं के लिए यह गर्व और प्रेरणा दोनों की बात है.