ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बार फिर कथित “जनफदा निकाह” और आत्मघाती दस्तों को लेकर अंतरराष्ट्रीय चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ईरान में ऐसे युवाओं की भर्ती बढ़ रही है, जिन्हें देश और मजहब के नाम पर आत्मघाती मिशनों के लिए तैयार किया जा रहा है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
बताया जाता है कि “जनफदा” शब्द उन लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो कथित तौर पर देश या मजहब के लिए अपनी जान कुर्बान करने को तैयार रहते हैं। इस अवधारणा को ईरान-इराक युद्ध के दौर से जोड़कर देखा जाता है, जब युवाओं को धार्मिक और राष्ट्रवादी भावनाओं के जरिए युद्ध के लिए प्रेरित किया जाता था।
कुछ रिपोर्ट्स में दावा है कि ऐसे युवाओं के निकाह की परंपरा भी चर्चा में है, जिसमें युद्ध या मिशन पर जाने से पहले शादी कराई जाती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इन दावों को लेकर कई तरह की अतिशयोक्ति और प्रचार भी देखने को मिलता है, इसलिए इन्हें सावधानी से समझने की जरूरत है।
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और प्रॉक्सी संघर्षों के बीच “असिमेट्रिक वॉरफेयर” यानी गैर-पारंपरिक युद्ध रणनीतियों को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। अमेरिका, इजरायल और पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियां भी इस तरह के संभावित नेटवर्क और कट्टरपंथी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि धार्मिक आस्था, राष्ट्रवाद और क्षेत्रीय संघर्षों का मिश्रण आने वाले समय में वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।