पढ़ने-लिखने की उम्र में घातक कदम उठा रही हैं नाबालिग लड़कियां, डराने वाले हैं बूंदी के आंकड़े!

Global Bharat 30 May 2024 08:43: PM 2 Mins
पढ़ने-लिखने की उम्र में घातक कदम उठा रही हैं नाबालिग लड़कियां, डराने वाले हैं बूंदी के आंकड़े!

डिजिटलीकरण की वजह से जहां एक तरफ लोगों के काम आसान हो गए हैं, वहीं इसके जाल में फंस कर युवओं के भविष्य भी बर्बाद हुए हैं इस बात को कई नहीं नाकार सकता है. वहीं इसके फायदे और नुकसान दोनों हैं. मगर यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसका इस्तेमाल कैसे करते हैं. अगर समझदारी से इस्तेमाल किया जाए तो यह वरदान साबित हो सकता है. अगर नहीं, तो यह निश्चित रूप से अभिशाप बन सकता है.

एक तरफ जहां अधुनिकता और डिजिटलीकरण की वजह से लोगों में लाभकारी बदलाव आया है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय संस्कृति के नाश का कारण भी अधुनिकता ही है. क्योंकि इसके जाल में फंसकर लाखों युवा और नाबालिग बर्बाद हो रहे हैं. इसके साथ ही युवाओं के संस्कारों में भी आमूलचूल बदलाव आया है और यह पदलाव पॉजिटिव तो बिल्कुल नहीं कहा जा सकता है. क्योंकि बच्चे पढ़ाई लिखाई की उम्र में प्यार-मोहब्बत में पड़ कर घातक कदम उठा रहे हैं.

दरअसल, राजस्थान के बूंदी से ऐसे आंकड़े निकल कर सामने आए हैं, जिसे देखकर आप चौंक जाएंगे. इसे लेकर पुलिस में कई मामले भी दर्ज हो चुके हैं, लेकिन मामला कम होने का नाम नहीं ले रहा है. इस आंकड़े का खुलासा बाल कल्याण समिति की ओर से किया गया है. पूरे मामले को समझने के लिए इस रिपोर्ट को जरूर पढ़ें.

दरअसल, जारी आंकड़ों में बताया गया है कि बूंदी जिले के विभिन्न थाना क्षेत्र में 3 वर्षों में करीब 450 लड़कियां घर से गायब हुई हैं. इन आंकड़ों के अनुसार साल 2021 में 137, 2022 में 134, 2023 में 135 और 20 मई 2024 तक 41 नाबालिग लड़कियों घर से गायब हुई हैं. वहीं पिछले 1 महीने में एक दर्जन नाबालिग घर से गायब हो चुकी हैं. इनमें अधिकांश मामले प्यार, मोहब्बत के सामने आए हैं. 

जानकार बताते हैं कि नाबालिग बच्चों के प्यार, मोहब्बत में फंसने की घटनाएं समाज के लिए बेहद चिंता का विषय हैं. जिस उम्र में बच्चों को पढ़-लिखकर अपने भविष्य की नींव मजबूत करनी होती है, उस अवस्था में नाबालिग बच्चे प्यार और इश्क के दलदल में फंसते जा रहे हैं. इसके पीछे के कारणों पर बात की जाए तो डिजिटलीकरण, आधुनिकता की चकाचौंध और मोबाइल का उपयोग इन घटनाओं के लिए काफी हद तक जिम्मेदार है.

इन आंकड़ों से पता चलता है कि नाबालिगों के घर से भागने की घटनाओं के पीछे कहीं ना कहीं परिवार के लोगों की बड़ी लापरवाही भी सामने आई है. परिजनों की ओर से बच्चों की पूरी निगरानी नहीं कर पाना एक अहम कारण है.

इसके अलावा अक्सर देखने में आया है कि नाबालिग लड़कियां अपना अधिकांश समय मोबाइल पर बिताती हैं, जिसके चलते सोशल मीडिया से कई लोगों के संपर्क में आती हैं और झूठे झांसे में फंसकर घर से भागने का कदम तक उठा लेती हैं. इससे प्रेम जाल में फंसने के बाद नाबालिग अपने भविष्य को चौपट कर रहीं हैं.

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