नई दिल्ली: देश में इंजीनियरिंग शिक्षा क्षेत्र एक बार फिर सिकुड़ता दिख रहा है. अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के अनुसार, सत्र 2025-26 में कुल 58 इंजीनियरिंग और टेक्निकल कॉलेज प्रगतिशील रूप से बंद कर दिए गए हैं. इनमें सबसे ज्यादा छंटनी उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में हुई है. AICTE ने स्पष्ट किया है कि इन कॉलेजों में नए छात्रों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा, लेकिन पहले से पढ़ रहे छात्र अपनी डिग्री पूरी कर सकेंगे.
राज्यवार बंद हुए कॉलेज
क्यों बंद हो रहे हैं कॉलेज?
AICTE ने संस्थान-वार कारण नहीं बताए, लेकिन विशेषज्ञों ने कम छात्र प्रवेश (Falling admissions), वित्तीय अस्थिरता, छात्रों की बदलती पसंद अब AI, डेटा साइंस, इंटरडिसिप्लिनरी कोर्सेस की ओर रुझान बढ़ा है और बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को कॉलेज बंद होने के प्रमुख कारण मान रहे हैं.
यह रुझान दर्शाता है कि अब मात्र कॉलेजों की संख्या बढ़ाने पर जोर नहीं, बल्कि गुणवत्ता और रोजगारपरक शिक्षा पर फोकस किया जा रहा है. AICTE के इस कदम से इंजीनियरिंग की पढ़ाई लेने वाले छात्रों को सलाह दी जा रही है कि वे केवल डिग्री के नाम पर नहीं, बल्कि स्किल, कोर्स की प्रासंगिकता और प्लेसमेंट रिकॉर्ड को ध्यान में रखकर संस्थान चुनें.