मोईद ख़ान का किस्सा अभी चर्चा में ही था...न्याय अभी तक मिला भी नहीं था...लेकिन उसके पहले कानपुर की एक ख़बर ने फिर से योगी सरकार की नींद उड़ा दी! क्या कोई कहानी नई है? या कोई साज़िश नई है? शक्ल से एकदम शांत, अक्ल से एकदम शातिर, चेहरा देखकर क्या कोई यकीन कर पाएगा ये मोईद खान का हमशक्ल है...? अयोध्या के बाद कानपुर की घटना कई सवालों की तरफ इशारा करती है.
कानपुर में 70 वर्षीय एक मौलाना पर 8 साल की नाबालिग बच्ची से रेप की कोशिश का आरोप लगा है…आरोपी मौलाना का नाम मुख़्तार है…उसे लोग मौलाना चच्चा नाम से भी बुलाते हैं…लोगों ने आरोपित को संदिग्ध हालत में पकड़ लिया था लेकिन पंचायत कर मामले को निबटाने के चक्कर में आरोपी फरार हो गया...मुख़्तार की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की 5 टीमें अलग-अलग जगहों पर लगातार दबिश दे रही है...उसके रिश्तेदारों और परिजनों से भी पूछताछ चल रही है...9 अगस्त के दिन वो बच्ची को चॉकलेट देने के नाम पर बुलाता है, फिर वो करता है जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी...
मामला कानपुर शहर के थानाक्षेत्र ग्वालटोली का है…शुक्रवार को एक महिला ने पुलिस में तहरीर दी… तहरीर में महिला ने बताया है कि शुक्रवार की शाम 7:30 के आसपास उनकी 8 साल की बेटी घर के बाहर खेल रही थी. तभी मौलाना चच्चा नाम से चर्चित मुख़्तार ने बच्ची को चॉकलेट का लालच देकर अपने पास बुलाया. बच्ची उसकी बातों में आकर पास चली गई. मौलाना बच्ची को गोद में लेकर बदनीयती से अपने कमरे में घुस गया. फिर जो हुआ उसकी उम्मीद किसी को नहीं थी.
बच्ची की आवाज़ सुनकर गेट तोड़ा गया, मौलवी को रंगे हाथों पकड़ा गया, फिर किस बात की पंचायत हो रही थी, पूरी कोशिश की गई कि बात योगी तक ना पहुंचे, ना ही कोई शिकायत करे, पंचायत बुलाई जाती है, ताकि मौलवी को कोई सज़ा देकर छोड़ दिया जाए, लेकिन पीड़िता का परिवार थाने पहुंच जाता है, और तब तक मौलवी फरार हो जाता है या करवा दिया जाता है, 70 साल की उम्र उसने ऐसा क्यों किया ये भी आपको बताएंगे, लेकिन पहले सुनिए थाने में क्या हुआ?
योगी आदित्यनाथ से उम्मीद करना ठीक है लेकिन क्या काम योगी ही करेंगे? मुहल्ले के लोग पंचायत में मामले को क्यों ले जाना चाहते थे? पीड़ित परिवार को क्यों रोका गया? पीड़ित परिवार के घर कई लोग पहुंच कर दबाव क्यों बनाते हैं? गुनाहगार को गुनाहगार कब कहा जाएगा? मोईद खान के DNA की मांग करने वाले अखिलेश यादव क्या जवाब दे पाएंगे? बता पाएंगे कि ये क्या हो रहा है? जब किसी बड़ी घटना में किसी आरोपी का साथ कोई बड़ा नेता देता है तो फिर नतीजे ऐसे ही होते हैं? कल अयोध्या में मोईद था, आज कानपुर में मुख्तार है, कल फिर कोई होगा? क्या अखिलेश यादव एक बार बोल पाएंगे मोईद और मुख्तार ने जो किया वो गलत है और हमेशा ही गलत कहा जाएगा