पिछले वर्ष 2024 में 19 और 20 दिसंबर को पटना में आयोजित हुआ था बिहार बिजनेस कनेक्ट
विभिन्न क्षेत्रों की अग्रणी कंपनियों के साथ 423 समझौतों पर हुए थे हस्ताक्षर
इस कार्यक्रम में 1.80 लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावों पर लगी थी मुहर, अब तक 45 फीसदी निवेश
पटना: बिहार में अब औद्योगिक क्रांति ने रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है. विभिन्न क्षेत्रों में निवेश को आकर्षित करने के लिए पिछले वर्ष 2024 में 19 और 20 दिसंबर को पटना में बिहार बिजनेस कनेक्ट का आयोजन किया गया था. इस दौरान अलग-अलग क्षेत्रों की अग्रणी कंपनियों के साथ 423 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसमें कुल 1 लाख 80 हजार करोड़ रुपये के निवेश शामिल हैं. अब ये प्रस्ताव मूर्तरूप लेने लगे हैं. हस्ताक्षर हुए इन 423 एमओयू में 75 फीसदी और कुल निवेश मूल्य का करीब 45 प्रतिशत राशि यानी करीब 82 हजार 584 करोड़ रुपये के निवेश की प्रक्रिया शुरू हो गई है.
विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, सभी प्राप्त प्रस्तावों को दो मुख्य श्रेणियों ग्राउंडेड और नन-ग्राउंडेड में विभाजित किया गया है. ग्राउंडेड परियोजनाओं का मतलब वैसे प्रस्तावों से हैं, जिन्हें निजी या बियाडा के माध्यम से सरकारी जमीन मिल गई है. इसमें वैसी योजनाएं भी शामिल हैं, जो पहले से क्रियान्वित की जा रही हैं. वहीं, नन-ग्राउंडेड श्रेणी में वैसी योजनाओं को रखा गया है, जो विभिन्न स्तर पर स्वीकृति की प्रक्रिया से गुजर रही हैं. इसमें वे परियोजनाएं शामिल हैं, जिनके निवेशक उपर्युक्त भूमि की पहचान, परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) का अंतिम रूप, आंतरिक अनुमोदन की प्रक्रिया या अन्य परिचालन पक्षों पर कार्य कर रहे हैं. कुछ एमओयू ऐसे भी हैं, जिन पर हस्ताक्षर के बाद कोई प्रगति नहीं हुई है या कंपनियों की तरफ से आंतरिक कारणों से प्रस्ताव वापल ले लिया गया है.
उद्योग विभाग प्रत्येक परियोजना की प्रगति पर सतत निगरानी रख रहा है और सभी संबंधित पक्षों के साथ सक्रिय समन्वय कर रहा है. इससे समयबद्ध प्रगति सुनिश्चित की जा सके. शीर्ष स्तर से निरंतर मार्गदर्शन और समर्थन के साथ इस ऐतिहासिक निवेश में रुचि को ठोस औद्योगिक विकास, बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन और समावेशी आर्थिक परिवर्तन में परिवर्तित करने की दिशा में तेजी से अग्रसर है.
317 प्रस्तावों को अमलीजामा पहनाने की प्रक्रिया शुरू
हस्ताक्षर हुए एमओयू में ग्राउंडेड एमओयू की संख्या 317 है. यानी इतने प्रस्तावों को मूर्तरूप देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. इसमें विभिन्न सेक्टर में 82 हजार 584 करोड़ रुपये के निवेश की कवायद तेजी से चल रही है. इनमें 11 हजार 16 करोड़ रुपये के 53 ऐसे प्रस्ताव हैं, जिनके लिए निजी या बियाडा से सरकारी भूमि मिल चुकी है. इसके अलावा 6 हजार 794 करोड़ रुपये की 167 परियोजनाएं ऐसी हैं, जिन पर विभिन्न विभागों से अनुमोदन मिल चुका है या इसकी प्रक्रिया जारी है.
खाद्य प्रसंस्करण, स्वास्थ्य समेत अन्य में निवेश अधिक
निवेश से जुड़े जो प्रस्ताव जमीन पर उतरने लगे हैं, उसमें खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र से जुड़े 12 हजार 544 करोड़ रुपये के 49 प्रस्ताव, टेक्सटाइल क्षेत्र में 730 करोड़ रुपये के 16, लॉजिस्टिक में 1 हजार 427 करोड़ रुपये के 7, प्लास्टिक में 665 करोड़ रुपये के 5, आईटी में 202 करोड़ रुपये के 12, स्वास्थ्य क्षेत्र में 1 हजार 328 करोड़ रुपये के 30, रियल एस्टेट में 2 हजार 920 करोड़ रुपये के 4, ऊर्जा क्षेत्र में 37 हजार 950 करोड़ के 3, पर्यटन क्षेत्र में 1 हजार 647 करोड़ रुपये के 11 के अलावा कुछ अन्य क्षेत्रों में निवेश से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं.
बिहार में इतिहास में हुआ यह पहली बारः मंत्री
उद्योग के क्षेत्र में इस उल्लेखनीय उपब्धि पर उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा ने बताया कि बिहार के इतिहास में यह पहली बात हुआ है. एक साथ 423 एमओयू पर हस्ताक्षर हुए हैं. समझौता पत्र पर हस्ताक्षर होने के बाद उद्योग विभाग की टीम लगातार निवेशकों से संपर्क करके इसे मूर्तरूप देने में जुटी हुई है. इस दिशा में सतत मॉनीटरिंग की जा रही है. निवेशकों की हर जरूरत का ध्यान रखते हुए विभाग के स्तर पर प्रस्ताव को अमलीजामा पहनाने की कवायद निरंतर जारी है.