Warangal Ancient Shiva Temple: तेलंगाना के वारंगल जिले में करीब 800 साल पुराने शिव मंदिर के ध्वस्त होने से बड़ा आक्रोश फैल गया है. ग्रामीणों और राजनीतिक नेताओं ने अधिकारियों पर क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहर को विकास के नाम पर नष्ट करने का आरोप लगाया है. यह मंदिर अशोक नगर गांव में एक ऐतिहासिक मिट्टी के किले के अंदर स्थित था.
इसे एकीकृत स्कूल (Integrated School) प्रोजेक्ट के लिए भूमि समतलीकरण के दौरान तोड़ दिया गया. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मंदिर काकतीय काल का है और काकतीय शासक गणपति देव के शासनकाल में बने मिट्टी के किले के अंदर स्थित था.
मंदिर के ध्वस्त होने की तस्वीरें क्षेत्र में फैलने के बाद विवाद तेज हो गया. ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने सालों तक मंदिर की जीर्णोद्धार और परंपरागत पूजा-पाठ को फिर से शुरू करने के लिए सरकार से अपील की थी, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया.
ग्रामीणों का आरोप: मंदिर को वर्षों से नजरअंदाज किया गया
ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर लंबे समय से उपेक्षित अवस्था में पड़ा था. सरकार से बार-बार जीर्णोद्धार की मांग की गई, लेकिन कोई संरक्षण कार्य नहीं कराया गया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पहले भी अज्ञात लोगों ने मंदिर स्थल पर छिपे खजाने की तलाश में कई बार खुदाई की और यहां विस्फोटक तक इस्तेमाल किए थे.
अब मंदिर के पूरी तरह ध्वस्त हो जाने से ग्रामीणों में भारी गुस्सा है.एक ग्रामीण ने प्रदर्शन के दौरान कहा, “पुरातत्व विभाग तक ने कुछ नहीं किया. इतना महत्वपूर्ण ऐतिहासिक मंदिर कैसे बिना अनुमति के तोड़ा जा सकता है?”
स्कूल प्रोजेक्ट ने बढ़ाया विवाद
राज्य सरकार ने क्षेत्र में 30 एकड़ से ज्यादा जमीन एकीकृत स्कूल बनाने के लिए चिन्हित की थी. साइट क्लियरिंग के दौरान यह प्राचीन मंदिर ध्वस्त हो गया. इस घटना पर सभी राजनीतिक दलों से आलोचना हुई है. नेताओं ने मंदिर के पुनर्निर्माण और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो बड़े स्तर पर प्रदर्शन किए जाएंगे.
अधिकारियों का आश्वासन: मंदिर का पुनर्निर्माण होगा
विवाद बढ़ने के बाद वारंगल जिले की कलेक्टर सत्या शारदा और नरसंपेट विधायक डोंथी माधव रेड्डी घटनास्थल पर पहुंचे.
विधायक माधव रेड्डी ने कहा कि स्कूल प्रोजेक्ट के लिए इस जगह को इसलिए चुना गया क्योंकि यहां खुली जगह और हरियाली थी, लेकिन सर्वे के दौरान प्राचीन मंदिर की उपस्थिति नजर नहीं आई. उन्होंने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि शिव मंदिर को उसी जगह पर स्कूल प्रोजेक्ट के साथ ही पुनर्निर्मित किया जाएगा. साथ ही मंदिर में देवी सरस्वती की मूर्ति भी स्थापित की जाएगी.
जिला कलेक्टर सत्या शारदा ने कहा कि प्राचीन स्मारक “दुर्लभ धरोहर” हैं और इन्हें भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रशासन पुरातत्व विभाग से परामर्श कर मूल डिजाइन का अध्ययन करके मंदिर का पुनर्निर्माण कराएगा.
राजनीतिक दोषारोपण तेज
इस घटना ने तेलंगाना में राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है. बीजेपी जिला महासचिव राणा प्रताप रेड्डी ने मंदिर तोड़े जाने की निंदा करते हुए कहा कि इसे मूल वास्तुकला शैली में ही पुनर्निर्मित किया जाना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि पुरातत्व विभाग की अनुमति के बिना मंदिर ध्वस्त किया गया. पूर्व बीआरएस विधायक पेड्डी सुदर्शन रेड्डी ने भी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि विकास के नाम पर तेलंगाना की धरोहर को नजरअंदाज किया जा रहा है.
उन्होंने ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई और यह स्पष्ट करने की मांग की कि क्या आधिकारिक अनुमति लेकर मंदिर तोड़ा गया था. ग्रामीणों के लिए अब यह मुद्दा सिर्फ एक मंदिर तोड़े जाने का नहीं, बल्कि यह सवाल है कि तेज विकास के बीच सदियों पुरानी धरोहरों को बिना उचित संरक्षण के कैसे बचाया जा सकता है.