नई दिल्ली: नोएडा के सेक्टर-126 पुलिस थाने में एक महिला अधिवक्ता ने गंभीर आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. उनके अनुसार, 3 दिसंबर 2025 की रात को वे अपने क्लाइंट की सहायता के लिए थाने गई थीं, जहां पुलिसकर्मियों ने उन्हें करीब 14 घंटे तक गैरकानूनी रूप से हिरासत में रखा और यौन उत्पीड़न के साथ-साथ यातना दी.
याचिका में दावा किया गया है कि थाने के एसएचओ सहित पुरुष पुलिस कर्मियों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया, धमकियां दीं और सीसीटीवी कैमरे को जानबूझकर ब्लॉक कर दिया गया. महिला वकील ने यह भी कहा कि पुलिस ने जबरन उनका फोन अनलॉक करवाया और सबूत मिटा दिए.
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए शुक्रवार को सुनवाई की. कोर्ट ने कहा कि आमतौर पर ऐसे मामले सीधे स्वीकार नहीं किए जाते, लेकिन आरोपों की भयावहता और पुलिस थानों में सीसीटीवी की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दे को ध्यान में रखते हुए याचिका पर विचार किया जा रहा है.
पीठ ने गौतम बुद्ध नगर के पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि घटना वाले दिन की थाने की सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखा जाए, इसे डिलीट न किया जाए और सीलबंद लिफाफे में कोर्ट में पेश किया जाए. कोर्ट ने केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
अगली सुनवाई 7 जनवरी 2026 को होगी, जब तक फुटेज जमा करानी है. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सीसीटीवी से जुड़े बड़े मुद्दे पर पहले से ही विचार चल रहा है, इसलिए इस मामले में हस्तक्षेप जरूरी है. यह घटना पुलिस हिरासत में महिलाओं की सुरक्षा और वकीलों के पेशेवर कर्तव्यों के निर्वहन पर गंभीर सवाल उठाती है.