नई दिल्ली: जम्मू में अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत जम्मू विकास प्राधिकरण (JDA) ने हाल ही में एक फ्रीलांस पत्रकार अराफाज अहमद डिंग के पारिवारिक घर को ध्वस्त कर दिया. यह घटना अब राजनीतिक विवाद का केंद्र बन चुकी है, जहां एक ओर हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल कायम हो रही है, वहीं दूसरी ओर सियासी आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं.
डिंग के ट्रांसपोर्ट नगर स्थित तीन मरला के छोटे से घर को बुलडोजर से नेस्तनाबूद करने के ठीक अगले दिन उनके हिंदू पड़ोसी कुलदीप शर्मा ने संवेदनशीलता दिखाते हुए पांच मरला की अपनी जमीन का गिफ्ट डीड तैयार कर उन्हें सौंप दिया. कुलदीप की बेटी ने यह दस्तावेज डिंग परिवार को भेंट किए, और इस पल का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.
कुलदीप ने कहा, "मैं यह देख नहीं सका कि पूरा परिवार, जिसमें बच्चे भी शामिल हैं, खुले आसमान तले रहने को मजबूर हो. जो लोग बिना सोचे-समझे घर तोड़ते हैं, वे बेरहम हैं. अगर वे तीन मरला पर बुलडोजर चलाएंगे, तो मैं दस मरला दूंगा. जम्मू की भाईचारे वाली परंपरा को कोई छू नहीं सकता." उन्होंने वादा किया कि नए मकान के निर्माण में भी वे हर संभव सहायता करेंगे.
इस नेक काम की लोगों ने खूब सराहना की, इसे कश्मीरियत की जीत करार दिया. पत्रकार डिंग ने ध्वस्त घर को अपने पिता की 40 साल पुरानी मेहनत बताया, जो जौहर यूनिवर्सिटी के पास स्थित था. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें कोई पूर्व नोटिस नहीं दिया गया और यह कार्रवाई उनकी पत्रकारिता के खिलाफ बदले की भावना से प्रेरित है.
डिंग बॉर्डर पार ड्रग तस्करी, अवैध गतिविधियों और सामाजिक मुद्दों पर खबरें चलाने के लिए जाने जाते हैं. 2002 में भी जम्मू में तोड़फोड़ विरोधी प्रदर्शनों की कवरेज के चलते उन्हें गिरफ्तार किया गया था. उन्होंने इसे प्रशासनिक तानाशाही करार देते हुए कहा कि यह उनकी आवाज दबाने की कोशिश है.
इस घटना ने जम्मू-कश्मीर की उमर अब्दुल्ला सरकार और बीजेपी के बीच तीखी बहस छेड़ दी है. पूर्व बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रविंदर रैना ने घटनास्थल का दौरा कर प्रभावित परिवार से मुलाकात की और JDA की कार्रवाई की निंदा की.
रैना ने लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा से बात का हवाला देते हुए कहा कि बुलडोजर कार्रवाई का कोई आदेश केंद्र से नहीं आया था. उन्होंने चुनी हुई सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा, "हम ऐसी तोड़फोड़ का समर्थन नहीं करते. जम्मू पर ज्यादा ध्यान दें, जहां अपराध बढ़ रहा है और महिलाएं असुरक्षित महसूस कर रही हैं." रैना ने कुलदीप के कदम की तारीफ करते हुए कहा कि यही हमारा जम्मू-कश्मीर है, जहां मुस्लिम परिवार पर मुसीबत आते ही हिंदू पड़ोसी आगे आ जाता है.
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इसे साजिश का हिस्सा बताते हुए कहा कि चुनी हुई सरकार को बदनाम करने के लिए राज भवन द्वारा नियुक्त अधिकारी बिना मंत्रियों की जानकारी के बुलडोजर चला रहे हैं. उन्होंने सवाल उठाया, "जम्मू में क्या सिर्फ यही एक जगह अतिक्रमण थी? एक खास समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है."
अब्दुल्ला ने JDA से अवैध कब्जों की पूरी सूची मांगी है और अखबारों में प्रकाशित करने की मांग की. विधानसभा में सरकार ने स्वीकार किया कि JDA की 16,212 कनाल और दो मरला से अधिक जमीन पर कब्जे हैं, जबकि जम्मू नगर निगम के चट्ठा क्षेत्र में आठ कनाल 16 मरला पर. पूर्व सीएम और PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने इसे मुसलमानों के खिलाफ चयनात्मक कार्रवाई बताया, इसे यूपी जैसी नीतियों से जोड़ा. कांग्रेस नेता रमन भल्ला ने भी नोटिस के बिना कार्रवाई को अमानवीय ठहराया.
PDP प्रतिनिधिमंडल ने इसे "चुनिंदा तोड़फोड़" करार देते हुए बड़े कब्जेदारों पर कार्रवाई की मांग की. कुल मिलाकर, यह घटना सामुदायिक सद्भाव की मिसाल तो बन गई, लेकिन राजनीतिक तनाव ने जम्मू की शांति पर सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रभावित परिवार को पुनर्वास के लिए JDA ने आश्वासन दिया है, लेकिन डिंग का कहना है कि न्याय मिलना चाहिए.