नई दिल्ली: 'रिच डैड पुअर डैड' के मशहूर लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने चांदी के शौकीनों को एक महत्वपूर्ण सलाह दी है. उनका कहना है कि हाल की तेज रैली के बाद बाजार में पीक के संकेत दिख रहे हैं और अगली बड़ी उछाल से पहले एक मजबूत करेक्शन या गिरावट आ सकती है. एक्स पर पोस्ट में उन्होंने लिखा कि सट्टेबाजों की मुनाफावसूली और FOMO (फियर ऑफ मिसिंग आउट) की वजह से यह "क्रैश जैसी" स्थिति पैदा हो सकती है.
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दोबारा ऊपर जाने से पहले बड़ा पुलबैक आएगा. साथ ही उन्होंने सिल्वर सट्टेबाजों की भारी बिकवाली से बाजार में तेज गिरावट की आशंका जताई. फिर भी, कियोसाकी का लंबी अवधि का नजरिया पूरी तरह सकारात्मक बना हुआ है. वे चांदी को अब भी सबसे सुरक्षित और बेहतरीन निवेश मानते हैं. उन्होंने दोहराया कि वे $100 प्रति औंस तक चांदी खरीदते रहेंगे और गिरावट आने पर भी धैर्य रखकर इंतजार करेंगे. उनका मानना है कि बाजार जब सही संकेत देगा, तब फिर से नई रैली शुरू होगी.
काफी अनुभवी हैं कियोसाकी
कियोसाकी ने बताया कि उन्होंने 1960 के दशक में मात्र 1 डॉलर प्रति औंस पर चांदी खरीदी थी. 1990 के आसपास जब भाव 4-5 डॉलर तक पहुंचे, तब से वे "सिल्वर बिलीवर" बन गए. दशकों के इस रिश्ते से वे जानते हैं कि बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य हैं, लेकिन लंबे समय में कीमती धातुएं मजबूत रहती हैं.
लालच से बचने की सीख
उन्होंने अपनी क्लासिक सलाह दोहराई और कहा कि लालच से बचें. यानी बुल मार्केट में जल्दबाजी और लालच से बचना चाहिए, वरना गिरावट में नुकसान हो सकता है. वे चांदी बेचकर डॉलर में कैश रखने के खिलाफ भी हैं, क्योंकि डॉलर की महंगाई और बढ़ते कर्ज के कारण मूल्य घटता जा रहा है. इसके बजाय, वे चांदी को सोने में बदलने पर विचार कर रहे हैं, ताकि हार्ड एसेट्स में संपत्ति सुरक्षित रहे.
वर्तमान बाजार का हाल क्या है
चांदी की कीमतें हाल ही में $90+ प्रति औंस के आसपास पहुंच चुकी हैं (कुछ दिनों में $91-92 तक रिकॉर्ड हाई छुआ), जो पिछले साल की तुलना में कई गुना ज्यादा है. लेकिन कियोसाकी का मानना है कि यह तेजी सट्टा-प्रधान है और सुधार जरूरी है. कियोसाकी की यह चेतावनी "डराओ मत, बल्कि तैयार रहो" वाली है. उन्होंने कहा कि गिरावट आएगी तो घबराना नहीं, बल्कि इसे खरीदारी का मौका मानना चाहिए. लंबे समय में चांदी (और सोना) उनके लिए सबसे मजबूत दांव बने रहेंगे.