नई दिल्ली: बुधवार को मिली अच्छी बढ़त के बाद गुरुवार सुबह भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान संकट पर दिए गए बयान ने बाजार का माहौल पूरी तरह बदल दिया. ट्रंप ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अपने सैन्य लक्ष्यों को पूरा करने के काफी करीब पहुंच गया है, लेकिन आने वाले 2-3 हफ्तों में और मजबूत कार्रवाई की जाएगी.
इस बयान को लेकर निवेशकों में अनिश्चितता फैल गई, जिसकी वजह से बाजार खुलते ही तेजी से नीचे गिर गया. सुबह के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 1464 अंक (लगभग 2%) की गिरावट के साथ 71,669 के स्तर पर पहुंच गया. वहीं निफ्टी 50 भी 466 अंक (2.06%) टूटकर 22,213 पर आ गया. इससे निवेशकों के करोड़ों रुपए का नुकसान हो गया. ट्रंप के भाषण में युद्ध को जल्द खत्म करने का संकेत तो था, लेकिन साथ ही अगले कुछ हफ्तों में और आक्रामक हमलों की बात ने मिडिल ईस्ट में लंबे तनाव की आशंका बढ़ा दी.
यही वजह रही कि घरेलू बाजार में हर तरफ बिकवाली का सिलसिला शुरू हो गया. कल यानी बुधवार को ठीक उलटा माहौल था. मिडिल ईस्ट तनाव कम होने की उम्मीदों के बीच सेंसेक्स ने 1,187 अंक की छलांग लगाई थी और निफ्टी भी मजबूती के साथ बंद हुआ था. लेकिन ट्रंप के ताजा बयान ने उस सकारात्मक सेंटिमेंट को एक झटके में बदल दिया.
सभी सेक्टरों पर पड़ा असर
बैंकिंग, ऑटो, मेटल, रियल्टी और फार्मा समेत लगभग हर प्रमुख क्षेत्र लाल निशान में रहा. निफ्टी के बड़े शेयरों में सन फार्मा, इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो), एशियन पेंट्स, श्रीराम फाइनेंस, एलएंडटी, एक्सिस बैंक और ट्रेंट जैसे स्टॉक सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वालों में शामिल रहे.
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
बाजार की इस गिरावट की एक बड़ी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी हैं. ट्रंप के भाषण के बाद ब्रेंट क्रूड में करीब 5% से ज्यादा की तेजी आई और यह 106.47 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया. WTI क्रूड भी 4.5% चढ़कर 104 डॉलर के ऊपर ट्रेड कर रहा है. भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए महंगाई का यह नया खतरा बन सकता है.
FIIs की बिकवाली जारी
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बुधवार को भी भारतीय बाजार से 8,331 करोड़ रुपए के शेयर बेचे. हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 7,171 करोड़ रुपए की खरीदारी की, लेकिन ग्लोबल अनिश्चितता के आगे यह सपोर्ट पर्याप्त नहीं साबित हुआ. बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में स्थिति तब तक अस्थिर रह सकती है, जब तक ईरान मुद्दे पर कोई ठोस सकारात्मक अपडेट नहीं आता.