योगी का वो अधिकारी कौन है, जिसने शहीद के स्मारक पर चलवा दिया बुलडोजर!

Global Bharat 01 Sep 2024 01:39: PM 2 Mins
योगी का वो अधिकारी कौन है, जिसने शहीद के स्मारक पर चलवा दिया बुलडोजर!

क्या हमारे देश के कुछ लोग अब शहीदों का सम्मान भी भूल गए हैं, क्या बुलडोजर की आड़ में कुछ अधिकारी सही और गलत का फर्क भूल गए हैं, आखिर वो अधिकारी कौन है, जिसकी पैमाइश में शहीद के स्मारक की जमीन कब्जे वाली निकलती है, और दल-बल के साथ वहां जाता है, बुलडोजर से स्मारक गिरा देता है, तस्वीरें वायरल होती है तो अखिलेश से लेकर तमाम लोग सवाल उठाने लगते हैं, लेकिन क्या ये सवाल सियासत से जुड़े हैं, क्या सेना पर सियासत करने की कोशिश हो रही है, या फिर कहानी कुछ और है, हमने भी ये वीडियो देखने के बाद इसे तफसील से समझने की कोशिश की तो जो पता चला वो हैरान करने वाला था.

पूरा मामला समाजवादी पार्टी के गढ़ मैनपुरी के गढ़िया घुटारा गांव का है, करगिल युद्ध में शहीद हुए मुनीश यादव का स्मारक यहां साल 2000 में बनाया गया था. सरकार ने मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित भी किया था. लेकिन 24 साल बाद एक वक्त ऐसा आया, जब सम्मान पाने वाले परिजन आंसूं बहाने पर मजबूर हो गए, वो कहने लगे हमलोगों को बिना कोई जानकारी दिए, एक दिन बुलडोजर आया और स्मारक को गिरा दिया. उस वक्त लेखपाल और राजस्व निरीक्षक भी मौजूद थे.

यानि जाहिर सी बात है इन दोनों ने ही रिपोर्ट तैयार की होगी, रिपोर्ट उच्चाधिकारियों तक भी गया होगा, तभी इतना बड़ा एक्शन हुआ होगा, फिर डीएम अविनाश कृष्ण सिंह को रिपोर्ट में कोई झोल क्यों नहीं दिखा, वहां के लोग कहते हैं. लेखपाल हर्ष कुमार ने पिछले साल ही शहीद स्मारक की जमीन की पैमाइश की थी. लेकिन अब उसी पैमाइश को वो गलत बता रहा है, गांव के लोगों से सांठ-गांठ करके उसने ऐसा किया.

अब डीएम साहब ने लेखपाल और राजस्व निरीक्षक से पूरी रिपोर्ट मांगी है, पर सवाल इस बात का है कि शहीद स्मारक अगर सरकारी जमीन पर भी बना था तो उसे रहने क्यों नहीं दिया गया, शहीदों को तो सरकार खुद सम्मान देती है, इंडिया गेट के पास बकायदा नेशनल वॉर मेमोरियल मोदी सरकार ने बनवाया, जो पिछली सरकारें शहीदों को सम्मान नहीं दे पाई, वो बीजेपी सरकार ने देने की कोशिश की, फिर वो अधिकारी कौन हैं, जो शहीद स्मारक पर ही बुलडोजर चला दे रहे हैं, क्या ऐसे लेखपाल और बाकी के अधिकारियों पर योगी सरकार कोई एक्शन लेगी, अखिलेश यादव तो बकायदा ट्वीट कर मांग करते हैं कि अगर बीजेपी में जरा भी शर्म बची है तो मंडल से लेकर जिले स्तर के सभी बड़े अधिकारियों को तत्काल निलंबित करे और प्रतिमा-स्मारक की ससम्मान पुनर्स्थापना करे. नहीं तो हम सब मिलकर ये कार्य करेंगे. यह घटना घोर निंदनीय है.

बुलडोजर एक्शन पर ये सवाल ऐसे वक्त में उठा है, जब कई भाईजान बुलडोजर पर ब्रेक लगाने की तैयारी में है, मध्य प्रदेश के छतरपुर में जबसे कांग्रेस नेताओं के करीबी शहजाद अली के आलीशान महल पर बुलडोजर चला है, एक पूरी टीम बुलडोजर एक्शन पर ब्रेक कैसे लगाया जाए, इसकी प्लानिंग बना रही है. ऐसी चर्चा है कि जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में फिर से याचिका लगाई जा सकती है, हालांकि पिछली बार तो सुप्रीम कोर्ट ने रोक से साफ-साफ इनकार कर दिया था, अब इस बार क्या होता है, ये देखने वाली बात होगी. पर सवाल इस बात का है कि क्या योगी की बुलडोजर पॉलिसी का क्या कुछ अधिकारी गलत फायदा उठा रहे हैं, जिसकी वजह से किरकिरी हो रही है.

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