Ayodhya Ram Mandir News : 1000 हज़ार पन्ने की रिपोर्ट में SIT की टीम ने ऐसा क्या लिखा है कि हर राम भक्त का दिल टूट सकता है. टिन्नू यादव से लेकर चंपत राय तक की गिरफ्तारी हो सकते हैं! ये रिपोर्ट सीएम योगी को सौंपी जाएगी, लेकिन मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि इस खेल में कुल 40 आरोपी हो सकते हैं. बाथरूम से लेकर रसोई तक नोटों को छिपाया गया था, चरण पादुका से लेकर चांदी के बिस्कुट को गला देने का दावा किया जा रहा है. इस गिनती के खेल में CCTV फुटेज़ को डिलीट किया गया. अनिल मिश्रा से लेकर गोपाल राव तक जांच का एंगल घुम चुका है, जबकि गोपाल राव के परिवार के लोग भी SIT के शक के दायरे में हैं. हैरानी की बात ये है कि महाकुंभ के दौरान सबसे भारी लूट मचाई गई.
एक ओर जिस वक्त महाकुंभ चल रहा था, अयोध्या में भीड़ टूट पड़ी थी, अपने प्रभु को देख जनता दान कर रही थी. दूसरी ओर टिन्नू उर्फ लूट गैंग बेसमेंट के रास्ते से माल निकाल रहा था. उस वक्त भीड़ का फायदा उठाकर क्या-क्या किया गया, SIT रिपोर्ट में इसका जिक्र हो सकता है. दावा किया जा रहा है कि 150 से ज्यादा लोगों तक शक की सुई घूम चुकी है, लेकिन कुल 40 ऐसे किरदार हो सकते हैं जिनके इशारे पर ये सारा खेल चल रहा था. अब कई सवाल खड़े होते हैं, चंपत राय का रिश्ता RSS और VHP से जुड़ा रहा है, राम मंदिर की देख-रेख के लिए जो ट्रस्ट चलता है उसमें किसी राजपूत की एंट्री नहीं है. योगी आदित्यनाथ पर ठाकुरवाद फैलाने का आरोप लगता है, लेकिन अब लोग सवाल उठा रहे हैं कि रघुवंशी के मंदिर में किसी रघुवंशी को शामिल क्यों नहीं किया गया.
SIT को कोई हैरान करने वाली बात पता चली. मंदिर में सिर्फ धन की लूट नहीं होती थी, बल्कि वहां कुछ और अनैतिक होने का शक है! 60 घण्टे तक लगातार SIT ने जांच की. बड़ा सवाल ये है कि करोड़ों भक्तों की भावनाओं के साथ जो हुआ उसका हिसाब SIT तो नहीं प्रभु श्रीराम ही कर सकते हैं. मामला इतना गंभीर है कि जिन लोगों को जिम्मेदारी मिली उन सभी ने या तो अपने ख़ास को मंदिर की देखरेख टीम में घुसाया या फिर अपने भरोसेमंद लोगों को जिम्मेदारी दी, यानि हर नियम ताक पर रखा गया. पुलिस सुरक्षा में तैनात तो थी लेकिन मंदिर के भीतर से हो रही चोरी को रोक नहीं पाई क्योंकि पुलिस पर टिन्नू का राज़ चलता था. चंपत राय पहले दिन वीडियो बनाकर दावा करते हैं कि मंदिर में कुछ भी गलत नहीं हुआ है, जबकि SIT रिपोर्ट में उन्हें जेल भेजने की सिफारिश हो सकती है.
योगी ने अयोध्या से ही ऐलान कर दिया था कि सख्त कार्रवाई होगी. दान देने वालों का दावा है कि दान में दी गई चांदी या किसी कीमती चीज़ की कोई रसीद नहीं मिली. जिस दिन प्रधानमंत्री नींव की पूजा कर रहे थे, उस दिन दान में 60 किलो चांदी और शिलाएं दी गई थी लेकिन वो भी गायब हो गए. मंदिर में सीता राम नाम की रसोई चलती थी, वहां तक घोटाले का तार जुड़ सकता है. सवाल ये है कि अयोध्या लखनऊ से बहुत कम दूरी पर है, फिर भी ये सब खेल इतने दिन कैसे चलता रहा. महाकुंभ के दौरान जब भक्त श्रीराम के दर्शन के लिए बेताब थे उस वक्त टिन्नू यादव और उनका गैंग लूट में व्यस्त था.
SIT रिपोर्ट के बाद मंदिर की व्यवस्था ट्रस्ट से लेकर योगी अपने प्रशासन को सौंप सकते हैं. संतों की मांग है कि सनातन बोर्ड होना चाहिए, मंदिरों की देखरेख का जिम्मा सनातन बोर्ड के पास रहना चाहिए, लेकिन हर भक्त आहत है कि आख़िर चोरी कैसे हुई. आपने सुना होगा कि किसी मंदिर की दानपेटी से कुछ रूपए चुराने वाले चोर भी पर्ची छोड़ जाते हैं कि मैंने ये मज़बूरी में किया लेकिन सीधे श्रीराम से पंगा लेने वाले ये लोग हैं ? और इन्हें कैसी सज़ा मिलेगी इसपर चर्चा हो रही है.