करो तैयारी क्योंकि सिस्टम सुधारने आ रहा है योगी का बुलडोज़र. बीजेपी को गांव में वोट कम मिला है तो योगी ने गांव की तस्वीर बदलने में पूरी ताकत लगा दी है. कहा जा रहा है कि योगी आदित्यनाथ का नया प्लान ऐसा है कि अगले 30 महीने में UP का नक्शा 90 डिग्री घूम जाएगा, क्योंकि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने भ्रष्टाचार पर कड़ी कार्रवाई की ठान ली है और इस बार यह कार्रवाई सिर्फ शहर ही नहीं बल्कि ग्रामीण स्तर पर भी दिखेगी.
सबसे बड़ी चोट शिक्षा माफियाओं पर होगी
UP के सरकारी स्कूलों की हालत बेहद नाज़ुक है. कहीं छत नहीं तो कहीं टीचर नहीं, किसी भी गांव में जाइए वहां सरकार स्कूलों की हालत एक जैसी ही मिलेगी. शिक्षकों की मनमानी के आगे हर नियम फेल हो जाता है. यहां तक कि कई शिक्षक अपनी राजनीति चमकाते हैं लेकिन स्कूल नहीं आते हैं. कहीं बारिश में छत टपकती है तो कहीं पढने वाले नहीं और जहां पढ़ने वाले बच्चे होते है वहां शिक्षक नहीं होता है. सरकार का फंड तो खर्च हो रहा है लेकिन कोई सरकार सरकारी स्कूलों लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठा पाई. योगी सरकार नया सिस्टम लेकर आ रही है, जिसमें अब शिक्षक को टाइम से स्कूल में आकर ऑनलाइन थंब लगाना होगा. यानी लेट आने वाले गुरू जी अब पहले आएंगे. सरकारी स्कूलों में अमीरों के बच्चे भी पढ़े, इसलिए सरकार अंग्रेज़ी पर फोकस होने जा रही है.
सॉल्वर गैंग से लेकर गांव के मठाधीश शिक्षकों तक बुलडोज़र!
इधर UP की राजधानी लखनऊ में सॉल्वर गैंग के लिए STF ख़ास तैयारी कर रही है, उधर गांव के शिक्षकों को सुधारने के लिए सरकार नियम ला रही है. सरकारी नौकरी मिलने के बाद ज्यादतर लोग तनख्वाह लेना पसंद करते हैं लेकिन काम करना नहीं, इसलिए शिक्षक, पुलिसकर्मी, या ऐसे विभागों में काम करने वालों का पेट वक्त से ज्यादा तेज़ी से बढ़ता है. योगी सरकार सॉल्वर गैंग यानि शिक्षा माफियाओं से लेकर शिक्षा के ठेकेदारों तक एक्शन की प्लानिंग कर रही है. दावा किया जा रहा है कि अब अगले 30 महीने तक योगी का बुलडोज़र नहीं रूकने वाला है.
भूमाफियाओं और प्रधानों पर भी बुलडोज़र चलेगा!
भूमाफिया का आतंक शहर-शहर और गांव-गांव तक फैला है. यही कारण है कि सबसे ज्यादा एक्शन की ज़रूरत ग्राम प्रधानों पर और भूमाफियाओं पर होना चाहिए. कहते हैं कि गांव में मनरेगा से लेकर सरकार की हर योजनाओं तक में सेंधमारी की जाती है, जनता को पूरा पैसा नहीं मिलता है, हर काम में कमीशन लिया जाता है. यही कारण है कि गांव में वो विकास का मॉडल नहीं दिखता है जो दिखना चाहिए. ग्राम प्रधानों की मनमानी का हाल ये है कि वो खुद तो बड़ा मकान बनवा रहे हैं लेकिन जनता बेहाल है. कहते हैं ग्राम प्रधानों की जांच होगी, सरकार इसपर तैयारी कर रही है. यानी यहां भी बुलडोज़र 30 महीने तक लगातार चलने वाला है.
ज़िला पंचायत सदस्य और VDO, CDO पर भी एक्शन का प्लान
गांव में पांच साल में जब चुनाव होता है तो आपको ज़िला पंचायत सदस्य और ज़िला पंचायत अध्यक्षों की आंधी दिखती होगी, लेकिन कभी सोचा है कि चुनाव के बाद वो वो कहां चले जाते है? चुनाव के बाद कई ज़िला पंचायत अध्यक्ष बनने के लिए ज़िला पंचायत सदस्यों को खरीद लिया जाता है और फिर वो अगले पांच साल तक मिली हुई राशि से मौज काटते हैं. जनता समझ ही नहीं पाती है कि ये पोस्ट किस लिए बना है? साल में करोड़ों का फंड मिलता है. गांव की कई सड़कें जिला पंचायत अध्यक्ष ही बनवाता है, लेकिन वो इतना पैसा हज़म करते हैं कि सड़कें अगले ही साल टूट जाती है, योगी सरकार बुलडोज़र का प्लान बना रही है. वहां भी जवाबदेही तय होगी.
योगी का आदेश, बेईमानों को कुर्सी से उतारें, सज़ा दीजिए
अगर देश बदलनाहैं तो फिर गांव को बदलना होगा. लेकिन गांव की जनता सबसे ज्यादा हलकान होती है. चुनाव में अभी 32 महीने का वक्त हैं, ऐसे में अगर योगी का बुलडोज़र गांवों की तरफ घूम गया तो फिर जो बदलाव दिखेगा उससे जनता को राहत मिलेगी, ऐसे एक्शन से माफिया और ठेकेदार योगी का विरोध करेंगे लेकिन सच्चाई ये है कि जनता खुश होगी तो फिर ठेकेदारों की हेकड़ी निकल जाएगी. आप खुद बताइए कि क्या आपके गांव में सरकार की सुविधाओं या योजनाओं का कोई लाभ मिल रहा है? अगर नहीं मिल रहा है तो फिर जिम्मेदार कौन है? सफाईकर्मी से लेकर ग्राम प्रधान तक क्या कर रहा है? मनरेगा के मज़दूरों का हक़ कौन छिन रहा है? क्यों सिस्टम इतना लाचार है कि गरीबी बढ़ रही है? कौन है जिम्मेदार? कुछ लोग अपनी कमाई तो बढ़ा लेते हैं लेकिन जनता की कमाई क्यों कम हो रही है?