...ये हैं बिहार के एडीजी कुंदन कृष्णन, जो बिहार में बढ़ते क्राइम की नई थ्योरी गढ़ रहे हैं. बड़ी ही आसानी से कह रहे हैं कि किसान इस दौरान खाली होते हैं, और क्राइम बढ़ जाता है,तो क्या पुलिस को इस दौरान हाथ पर हाथ रखने के लिए सैलरी मिलती है, क्या एडीजी साहब ये बताएंगे कि पटना के जिस पारस हॉस्पिटल में बंदूकधारी बदमाश घुसे, उन्हें भागते वक्त पुलिस क्यों नहीं पकड़ पाई.
फिर भी 5 बदमाश घटना को अंजाम देने के बाद कैसे फरार हो गए, पूरी घटना जिस तरीके से हुई है, उसने कई तरीके के सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं. विपक्ष नीतीश कुमार से इस्तीफा मांग रहा है, तो वहीं जेडीयू नेता तेजस्वी यादव को जंगलराज की याद दिला रहे हैं, पर सियासत के बीच में बिहार की जनता की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा, क्या अस्पताल भी अब सुरक्षित नहीं रहे, या फिर जिस बिहार पुलिस ने 2005 के बाद अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया था, वो अब अपराधियों के मंसूबों को डिकोड करने में फेल हो गई है. ये तस्वीरें काफी कुछ बयां करती हैं.
5 बदमाश पहुंचते हैं, करीब 15 मिनट तक इधर-उधर देखते हैं, फाइनल रेकी करके एग्जिट प्लान बनाते हैं, और 7 बजकर 15 मिनट पर हॉस्पिटल के अंदर दाखिल होते हैं, अगले तीन मिनट में वो सेकेंड फ्लोर पर जाते हैं, जहां चंदन मिश्रा नाम का गैंगस्टर भर्ती था, दरवाजा खोलकर सीधा उसके वार्ड में घुसते हैं, अपने मंसूबे को अंजाम देते हैं, और 30 सेकेंड के भीतर बाहर निकल जाते हैं, चार टोपी वाले और एक बिना टोपी वाला बदमाश बड़े आराम से पिस्टल को अपने कमर में खोंसता हुआ बाहर निकलता है, और सारे के सारे बाइक से फरार हो जाते हैं. अब बिहार पुलिस ने आरोपियों की तलाश में एसआईटी का गठन किया है, और जांच में खुलासा हुआ है कि ये घटना गैंगवॉर से जुड़ी है.
अस्पताल में गैंगवॉर, कौन जिम्मेदार
यानि मामला दो बदमाशों के बीच का है, पर आम जनता को डर इस बात का सता रहा है कि जिस अस्पताल में खास तौर पर आईसीयू में भर्ती मरीजों से मिलने के लिए परिजनों को एक निश्चित वक्त दिया जाता है, वहां बदमाश बंदूक लेकर कैसे घूम रहे हैं, क्या ये पुलिस की सुरक्षा पर सवाल नहीं है. कई लोग ये दावा कर रहे हैं कि वहां प्राइवेट सिक्योरिटी काम करती है, पर सड़क पर तो सरकारी पुलिसकर्मी होते हैं, फिर बदमाशों को आते-जाते पकड़ा क्यों नहीं.
इतनी बड़ी घटना के वक्त क्या बिहार पुलिस सो रही थी. और अब जब सवाल उठ रहे हैं, पूर्णिया सांसद पप्पू यादव हॉस्पिटल के अंदर जाने की कोशिश करते हैं तो उन्हें भी रोक दिया जाता है, उसके बाद वो सुरक्षाकर्मी को थप्पड़ ज़ड़ देते हैं, मामला इतना बढ़ चुका है कि हर कोई बस एक ही सवाल पूछ रहा है कि नीतीश बाबू क्राइम कंट्रोल की पहले वाली आपकी पॉलिसी कहां गई. चुनावी दौर में इस तरीके की घटना से किसे सियासी नफा और नुकसान है. जरा सोचिए और जवाब दीजिए.