राजकोट (गुजरात): नगर निगम ने ट्रैफिक आवाजाही में बाधा डाल रहे 12 छोटे धार्मिक स्थलों को हटाने का अभियान चलाया. देर रात की गई इस कार्रवाई से स्थानीय क्षेत्र में लोगों में नाराजगी फैल गई. खासकर केसरिया हनुमान मंदिर के आसपास बड़ी संख्या में भक्त इकट्ठा हो गए और रामधुन का जाप करते हुए विरोध जताया. प्रशासन ने रात करीब 1:30 बजे से सुबह 5 बजे तक यह अभियान चलाया.
राजकोट म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (RMC) की टीम ने पुलिस, फायर ब्रिगेड और PGVCL की मदद से मालवीय नगर और मवाड़ी इलाके में स्थित इन संरचनाओं को हटाया. रात का समय इसलिए चुना गया ताकि कोई बड़ा विवाद या भीड़ जुटने से स्थिति बिगड़ न जाए.
लोगों का विरोध और समझौता
मवाड़ी मेन रोड स्थित हनुमान मंदिर पर जब बुलडोजर पहुंचा तो स्थानीय लोग और युवा सड़क पर बैठ गए. उन्होंने रामधुन गाकर अपनी आस्था की रक्षा की मांग की. सुबह 4 बजे तक अधिकारियों से बहस चली. आखिरकार, पूरे मंदिर को गिराने के बजाय सिर्फ सड़क पर अतिक्रमण वाले छोटे हिस्से को हटाने और बाकी मंदिर को 48 घंटे में छोटा करके व्यवस्थित करने का आश्वासन मिलने के बाद मामला शांत हुआ.
किन-किन स्थलों पर हुई कार्रवाई
लोगों की शिकायत
स्थानीय लोगों का कहना है कि इनमें से कई मंदिर पुराने और आस्था के केंद्र हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य कई जगहों पर गलत कब्जे होने के बावजूद नगर निगम चुप्पी साधे बैठा है, जबकि इन मंदिरों पर बिना पर्याप्त नोटिस दिए कार्रवाई की गई. पुजारी हितेश डाभी ने कहा कि उनका मंदिर 45 साल पुराना है और सड़क के अंदर आ गया था, फिर भी इसे तोड़ने का फैसला आहत करने वाला है.
नगर निगम का पक्ष है कि ये सभी संरचनाएं सार्वजनिक सड़क पर अतिक्रमण कर रही थीं, इसलिए ट्रैफिक सुधार के लिए इन्हें हटाना जरूरी था. यह घटना राजकोट में धार्मिक स्थलों और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर संवेदनशील मुद्दा बन गई है.