हिंदुस्तान में एक संस्था है एडीआर यानी एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स, इसका काम है चुनाव प्रक्रिया और नेताओं पर नजर रखना, इसने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि 5 लाख 54 हजार 598 वोट कम गिने गए, इसके संस्थापक जगदीप छोकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहते हैं, 2024 चुनाव के आंकड़ों पर कई तरह के सवाल हैं, हमें चुनाव आयोग भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सका है. यानि एडीआर ने अपनी रिपोर्ट पर चुनाव आयोग से भी जवाब लेने की कोशिश की है, फिर सवाल है कि आखिर ये वोट कम क्यों गिने गए, अगर एडीआर की ये बात सच मान ली जाए तो दो तरह के सवाल यहां खड़े होते हैं.
पहला- क्या मोदी को 400 से कम सीटों पर रोकने की कोशिश के लिए ऐसा किया गया
दूसरा- क्या आंकड़े विपक्ष के पक्ष में आने वाले थे, क्योंकि उनका दावा तो यही है!
एडीआर अपनी रिपोर्ट में कई ऐसी बातें लिखता है, जिससे चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं, पहले आप पूरी रिपोर्ट देखिए फिर बताते हैं रोहिंग्या और बांग्लादेशियों वाला खेल क्या है.
एडीआर की रिपोर्ट में क्या-क्या
हालांकि एडीआर ने ये भी कहा है कि अमरेली, आटिंगल, लक्षद्वीप, दादर नगर हवेली और दमन दीव सीट पर किसी तरह का खेल नहीं हुआ, ऐसे में ये समझना जरूरी हो जाता है कि किन सीटों पर खेल बड़ा हुआ है, क्या उत्तर प्रदेश की जिन सीटों पर बीजेपी, कांग्रेस और सपा के बीच टक्कर था, वहां कोई खेल हुआ, चुनावी नतीजों के बाद ऐसी चर्चाएं भी थीं कि अधिकारियों ने सही से काम नहीं किया, यहां तक कि रायबरेली से एक जीशान नाम का लड़का भी पकड़ा गया, जो बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं के फर्जी डॉक्यूमेंट बनाता था, बंगाल में ये खेल बड़े लेवल पर चलता है, ऐसी रिपोर्ट कई बार सामने आई है, इसमें सच्चाई कितनी है, ये जांच एजेंसियां बता सकती हैं, लेकिन समझने वाली बात ये है कि क्या मतगणना में इतना बड़ा खेल देश के इतिहास में पहली बार हुआ है, या पहले भी ऐसा हो चुका है.
जब हम इससे जुड़ी जानकारी खंगालते हैं तो पता चलता है कि साल 2019 के चुनाव में कुल डाले गए वोटों और गिने गए वोटों का अंतर 7 लाख 39 हजार 104 था. तब 347 सीटों पर आंकड़े इधर-उधर दिखे थे. जिसके बाद कई तरह के सवाल खड़े हुए थे, अब एक बार फिर देश की व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं, कई लोग ये कह रहे हैं कि चुनाव से ऐन वक्त पहले वोटर लिस्ट से हमारा नाम हटा दिया गया तो वहीं कई लोग ये कह रहे हैं कि हमारे लोकसभा क्षेत्र में बड़ा खेल हुआ है, जिसकी जांच करना चुनाव आयोग का काम है, आप इस खुलासे पर क्या कहना चाहेंगे, कमेंट कर जरूर बताएं, क्योंकि सवाल 5 लाख वोटों का है, कई सीटों पर जीत का अंतर 10 हजार से भी कम होता है, इस हिसाब से अगर देखें तो मामला बड़ा नजर आता है.