केंद्र सरकार ने नॉर्थ ईस्ट के कुछ इलाकों में कानून व्यवस्था की समीक्षा के बाद सशस्त्र बल (Special Powers) अधिनियम (AFSPA) का विस्तार किया है. इस अधिनियम के तहत कुछ इलाकों को "अशांत क्षेत्र" के रूप में घोषित किया जाता है, जिससे सुरक्षा संचालन में सुविधा होती है. हाल ही में, नागालैंड के आठ जिलों और अरुणाचल प्रदेश के तीन जिलों समेत अन्य क्षेत्रों में AFSPA को छह महीने के लिए बढ़ाया गया है.
केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुताबिक, 1 अप्रैल 2024 से नागालैंड के आठ जिलों और 21 पुलिस थानों को "अशांत क्षेत्र" के तहत घोषित किया गया है. यह स्थिति 1 अक्टूबर 2024 से छह महीने तक प्रभावी रहेगी, जब तक इसे वापस नहीं लिया जाता. जिन जिलों में AFSPA को फिर से लागू किया गया है, उनमें डिमापुर, न्यूलैंड, चुमौकेडिमा, मोन, किफ़ायर, नोकलक, फेख, और पेरन शामिल हैं.
इसके अलावा, अरुणाचल प्रदेश के तिरप, चांगलांग और लॉन्गडिंग जिलों समेत नंसाई जिले के नंसाई, महादेवपुर, और चौकहाम पुलिस थानों के क्षेत्र को भी "अशांत क्षेत्र" घोषित किया गया है. ये फैसला कानून व्यवस्था की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए लिए गए हैं.
गृह मंत्री अमित शाह ने पहले कहा था कि AFSPA जम्मू और कश्मीर में लागू है, इसे 70% पूर्वोत्तर राज्यों से हटा लिया गया है. AFSPA सुरक्षा बलों को बिना वारंट के किसी भी स्थान पर प्रवेश करने, गिरफ्तारी करने और अन्य कार्यों को करने की अनुमति देता है. इस विस्तार से यह साफ होता है कि सरकार सुरक्षा स्थिति को गंभीरता से ले रही है और कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है.
AFSPA से क्या होता है?
दरअसल, किसी अशांत क्षेत्र में सशस्त्र बलों की गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने के लिए AFSPA के तहत अधिसूचित किया जाता है, ताकि वे तत्काल फैसला ले सके. AFSPA अशांत क्षेत्रों में काम करने वाले सशस्त्र बलों को तलाशी लेने, गिरफ्तार करने और जरूरत पड़ने पर फायरिंग करने के अधिकार देता है.