नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 लोगों की जान गई, के बाद भारत ने बुधवार को पाकिस्तान के खिलाफ बड़ा कूटनीतिक कदम उठाया. इस हमले को हाल के वर्षों में कश्मीर घाटी के सबसे घातक हमलों में से एक माना जा रहा है. भारत सरकार ने इस हमले के जवाब में पांच बड़े फैसले लिए, जिनमें 1960 में हुए सिंधु जल समझौते को निलंबित करना और पाकिस्तानी नागरिकों के लिए भारत में प्रवेश पर रोक लगाना शामिल है. ये फैसले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक के बाद लिए गए. आइए, इन फैसलों और हमले के बारे में आसान भाषा में विस्तार से जानते हैं.
भारत के पांच बड़े फैसले
पहलगाम में क्या हुआ?
मंगलवार दोपहर, पहलगाम से करीब 5 किलोमीटर दूर बैसरण मेडो में 5-6 आतंकवादियों ने पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलीबारी की. यह इलाका अपनी खूबसूरती के लिए मिनी स्विट्जरलैंड के नाम से जाना जाता है और यहां केवल पैदल या घोड़े से पहुंचा जा सकता है. आतंकवादियों ने पाइन के जंगलों से निकलकर पिकनिक मना रहे लोगों, घोड़े की सवारी करने वालों और खाने-पीने की दुकानों पर मौजूद लोगों पर हमला किया. इस हमले में 26 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे. मृतकों में संयुक्त अरब अमीरात और नेपाल के दो विदेशी नागरिक और दो स्थानीय लोग शामिल थे.
द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF), जो पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का एक हिस्सा माना जाता है, ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आतंकवादियों ने लोगों की धार्मिक पहचान पूछी और फिर गोलीबारी की. हमले की खबर मिलते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सऊदी अरब यात्रा को बीच में छोड़कर दिल्ली लौट आए. दिल्ली पहुंचते ही उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बैठक की. इसके बाद CCS की बैठक में ये पांच बड़े फैसले लिए गए.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हमले के कुछ घंटों बाद श्रीनगर पहुंचे. उन्होंने पहलगाम में हमले की जगह का दौरा किया और पीtariffड़ितों के परिवारों से मुलाकात की. उन्होंने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और पुलिस महानिदेशक के साथ सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की. जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस हमले को हाल के वर्षों में नागरिकों पर सबसे बड़ा हमला बताया.