उत्तर प्रदेश में हाइकोर्ट के फैसले के बाद भी 69000 शिक्षकभर्ती का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने आदेश को लागू करने और नियुक्ति देने की मांग को लेकर 20 अगस्त से SCERT कार्यालय निशातगंज पर प्रदर्शन शुरू किया हुआ है, जो आज चौथे दिन भी जारी है. इसे लेकर ईलाहाबाद हाइकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने शिक्षकभर्ती के संबंध में अपने फैसले में राज्य सरकार को 3 माह के भीतर पूरी चयन प्रक्रिया को दोबारा पूरी करने व आरक्षण के नियमों का सही से पालन करने का आदेश दिया है. फैसले के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी ये निर्णय लिया कि राज्य सरकार हाइकोर्ट के फैसले को मानते हुए नई चयनसूची जारी करेगी.
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अभ्यर्थी व संगठन के अध्यक्ष विजय यादव ने बताया कि हाइकोर्ट के फैसले और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्णय के बाद उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद जगी है, लेकिन हमें डर है कि बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी दोबारा इस मामले को लटकाने का प्रयास करेंगे. इसलिए जल्द से जल्द हाइकोर्ट के फैसले के अनुसार लिस्ट जारी की जाय और जबतक लिस्ट जारी नहीं हो जाती तबतक आंदोलन लगातार जारी रहेगा.
बता दें कि हाईकोर्ट ने अभ्यर्थियों को राहत देते हुए नई मेरिट लिस्ट जारी करने का आदेश दिया है, जिससे 6800 ऐसे शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं, जो पहले से ही नौकरी कर रहे हैं. इस फैसले के बाद प्रभावित शिक्षक कोर्ट में अपील करने और आंदोलन करने की योजना बना रहे हैं, जिससे मामले की जटिलता और बढ़ सकती है.
साथ ही योगी सरकार के पास इस स्थिति से निपटने के लिए 'सुपर न्यूमैरिक' यानी अतिरिक्त सीटें बढ़ाने का विकल्प बचा है. अगर सरकार इस विकल्प का उपयोग करती है, तो इससे न केवल प्रभावित शिक्षकों को राहत मिलेगी बल्कि नए अभ्यर्थियों को भी मौका मिलेगा.
इस मामले की जड़ें 25 जुलाई 2017 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़ी हैं, जब कोर्ट ने 1 लाख 37 हजार शिक्षामित्रों की सहायक शिक्षक के तौर पर नियुक्ति को अवैध करार दिया था. इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने दो चरणों में इन पदों को भरने का फैसला किया. पहले चरण में 68500 पदों पर भर्ती प्रक्रिया आयोजित की गई, और दूसरे चरण में दिसंबर 2018 में 69000 पदों पर भर्ती के लिए एड़वाइज़री जारी की गई.
हालांकि, दूसरे चरण में किए गए बदलावों के कारण यह प्रक्रिया विवादों में घिर गई। पहले चरण के मुकाबले दूसरे चरण में कट ऑफ लिस्ट में बदलाव किए गए, जिससे मामला अदालतों तक पहुंचा. इस बीच, योगी सरकार को इस भर्ती प्रक्रिया को पूरा करने के लिए हर संभव कदम उठाना होगा ताकि अभ्यर्थियों और नियुक्त शिक्षकों दोनों को न्याय मिल सके. इस भर्ती प्रक्रिया के नए दौर में क्या होगा, यह देखना दिलचस्प होगा. सरकार को अब आगे बढ़ते हुए सावधानी से कदम उठाने होंगे ताकि न केवल भर्ती प्रक्रिया सफल हो, बल्कि किसी भी पक्ष को अन्याय महसूस न हो.