नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर अब तक जो सिर्फ एक कयास था, वह अब हकीकत में बदलता दिख रहा है। सवाल था कि क्या AI वाकई इंसानी नौकरियों को निगल रहा है? जवाब है हां, ऐसा बिल्कुल होने वाला है. हाल ही में आई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स और टेक इंडस्ट्री के आंकड़ों ने इस चिंता को और गहरा कर दिया है। टेक जगत में हो रही छंटनी (Layoffs) के पीछे अब सीधे तौर पर AI को एक बड़ा कारण माना जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में लगभग 40% नौकरियां AI से प्रभावित होने की कगार पर हैं। विकसित देशों में यह आंकड़ा 60% तक पहुंच सकता है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि सही समय पर कदम नहीं उठाए गए, तो AI के कारण समाज में आर्थिक असमानता बहुत तेजी से बढ़ेगी।
टेक सेक्टर की छंटनी पर नजर रखने वाली वेबसाइट 'Layoffs.fyi' और वैश्विक कंसल्टेंसी फर्म्स के डेटा बताते हैं कि पिछले कुछ समय में कंपनियों ने बड़े पैमाने पर रिस्ट्रक्चरिंग (पुनर्गठन) की है। गूगल, मेटा और माइक्रोसॉफ्ट जैसी दिग्गज कंपनियों ने कोडिंग, कस्टमर सपोर्ट, डेटा एंट्री और कंटेंट राइटिंग जैसे विभागों में छंटनी की है और इन कामों के लिए AI टूल्स को तैनात किया है। टेक सीईओ का मानना है कि AI टूल्स कम लागत में 24 घंटे बिना थके काम कर सकते हैं, जिससे कंपनियों का ऑपरेशनल खर्च काफी कम हो जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट सिर्फ टेक सेक्टर तक सीमित नहीं है। फाइनेंस, लीगल, एडमिनिस्ट्रेशन और मीडिया इंडस्ट्री में भी एंट्री-लेवल की नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है। जो काम पहले 10 लोग मिलकर करते थे, वह अब एक कुशल प्रोफेशनल AI की मदद से अकेले कर पा रहा है।
हालांकि, एक्सपर्ट्स का एक दूसरा पहलू यह भी है कि AI नौकरियां पूरी तरह खत्म नहीं कर रहा, बल्कि उन्हें बदल रहा है। डेटा साइंटिस्ट, AI प्रॉम्प्ट इंजीनियर्स और साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स की मांग में भारी उछाल आया है। यानी, नौकरी केवल उनकी जा रही है जो खुद को नई तकनीक के हिसाब से अपग्रेड नहीं कर रहे हैं। रिपोर्ट का साफ संदेश है: 'AI आपकी नौकरी नहीं छीनेगा, बल्कि AI का इस्तेमाल करने वाला कोई दूसरा इंसान आपकी नौकरी ले जाएगा।'