मुजफ्फराबाद: पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में हालात पूरी तरह बेकाबू हो चुके हैं और वहाँ गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा हो गई है। पाकिस्तान के अवैध कब्जे और सरकार की दमनकारी आर्थिक नीतियों के खिलाफ रविवार को PoK में बगावत का एक नया और ऐतिहासिक अध्याय शुरू हो गया। जब आक्रोशित जनता ने अपनी बदहाली से तंग आकर एलओसी (LoC) पार कर भारत के जम्मू-कश्मीर जाने का खुला ऐलान कर दिया, तो बौखलाई शहबाज शरीफ हुकूमत और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने अपने ही निहत्थे नागरिकों पर अंधाधुंध गोलियां और आंसू गैस के गोले बरसा दिए। इस हिंसक और बर्बर कार्रवाई में कई लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है।
यह पूरी हिंसक चिंगारी रविवार सुबह उस वक्त भड़की, जब 'अवामी एक्शन कमेटी' के राष्ट्रव्यापी बंद और विरोध मार्च के आह्वान पर मुजफ्फराबाद, रावलकोट और मीरपुर समेत कई संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में हजारों लोग सड़कों पर उतरने लगे। दोपहर होते-होते इस महा-आंदोलन में केवल सामाजिक कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि करीब 40,000 से ज्यादा स्थानीय नागरिक, छात्र, व्यापारी और महिलाएं भी शामिल हो गईं, जिससे यह प्रदर्शन एक ऐतिहासिक जनसैलाब में बदल गया। प्रदर्शनकारियों का हुजूम जैसे ही पाकिस्तान प्रशासन द्वारा लगाए गए कड़े बैरिकेड्स को तोड़कर आगे बढ़ने लगा, सुरक्षा बलों ने उन्हें रोकने के लिए क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। पुलिस और रेंजर्स ने प्रदर्शनकारियों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा, हवाई फायरिंग की और सीधे जनता पर गोलियां चलाईं, जिससे मुजफ्फराबाद की सड़कें खून से सान गईं।
दरअसल, PoK की जनता का यह गुस्सा पिछले लंबे समय से आटे की भारी किल्लत, आसमान छूती महंगाई और बिजली के बिलों पर लगाए गए बेतहाशा टैक्स के कारण उबल रहा था। स्थानीय प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि PoK की नदियों से बनने वाली सस्ती पनबिजली पाकिस्तान के पंजाब प्रांत को सप्लाई की जाती है, जबकि खुद उनके क्षेत्र के लोगों को ही सबसे महंगी दर पर बिजली बेचकर घंटों की लोडशेडिंग दी जा रही है। शहबाज शरीफ सरकार द्वारा उनकी जायज मांगों को लगातार नजरअंदाज किए जाने और दमन चक्र चलाने के कारण अब लोगों ने साफ शब्दों में घोषणा कर दी है कि यदि पाकिस्तान उन्हें बुनियादी सुविधाएं नहीं दे सकता, तो वे अपने हक के लिए भारत के कश्मीर जाने के लिए तैयार हैं।
जनता के इस भारी विद्रोह को कुचलने के लिए शहबाज शरीफ सरकार के आदेश पर पूरे PoK में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं तुरंत बंद कर दी गई हैं, ताकि वहाँ सेना द्वारा की जा रही हिंसा की भयावह तस्वीरें और वीडियो दुनिया के सामने न आ सकें। चप्पे-चप्पे पर भारी संख्या में पाकिस्तानी सेना और अर्धसैनिक बलों (रेंजर्स) को तैनात कर दिया गया है। इसके बावजूद, स्थानीय जनता का हौसला टूटा नहीं है और लोगों ने साफ कर दिया है कि वे अब पाकिस्तानी हुकूमत की इस गुंडागर्दी के आगे झुकने वाले नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अपने ही लोगों पर गोलियां चलवाकर शहबाज शरीफ सरकार ने PoK पर से अपना नैतिक और प्रशासनिक नियंत्रण पूरी तरह खो दिया है।